झारखंड भोजपुरी विकास केंद्र, राँची में शारदीय नवरात्र पर 'घर ही में माई के बुलाइब, कलशा बइठाइब' कार्यक्रम आयोजित। राँची, पटना, जमशेदपुर व चंडीगढ़ के कलाकारों ने बांधा समां। पढ़ें पूरी खबर।
कंचन क्रांति न्यूज, राँची।
झारखंड भोजपुरी विकास केंद्र, राँची के तत्वावधान में गुरुवार (15 अक्टूबर 2026) को शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर भव्य सांस्कृतिक व साहित्यिक कार्यक्रम ‘घर ही में माई के बुलाइब, कलशा बइठाइब’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माँ दुर्गा के भजन-कीर्तन, पारंपरिक देवी गीतों और संगीतमय आरती से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में राँची, पटना, जमशेदपुर और चंडीगढ़ से आए कई नामचीन भोजपुरी भाषी साहित्यकारों व कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का आगाज
संस्था के अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव की अध्यक्षता तथा पूनम वर्मा के कुशल संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत जमशेदपुर की प्रसिद्ध कवयित्री वीणा पांडेय ‘भारती’ की सरस्वती वंदना ‘अब चुनरी चढ़ाईं ज्ञानदायिनी के’ से हुई। इसके बाद संस्था के सचिव बिनोद सिंह गहरवार ने दूर-दराज से आए अतिथि कवि-कवयित्रियों एवं कलाकारों का आत्मीय स्वागत किया। स्वागत के उपरांत भक्ति गीतों की अविरल धारा बहने लगी, जिसमें उपस्थित श्रोता भावविभोर होकर झूमते नजर आए।
साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से मोहा मन
इस मौके पर रचनाकारों ने अपना रचना से सबका मन मोह लिया। चंडीगढ़ के हरेंद्र सिन्हा ने उचरेला कागा आँगनवा हो, आज आइहें भवानी से भक्ति का वातावरण तैयार किया। जमशेदपुर की माधवी उपाध्याय ने ‘रुनझुन करत मैया अइली घर अंगना’ प्रस्तुत किया। राँची की पुष्पा पांडेय ने ‘मैया के शोभेला कंगना हो’, डॉ. उर्मिला सिन्हा ने ‘नीमिया के डार मैया लावेली ढुलुहवा’, सविता गुप्ता ने ‘नव दिन पूजा पाठ में’ और रिम्मी वर्मा ने ‘जय बोले सब लोगवा मंगल गीत गाइब हो’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
इसके अलावा हिमकर श्याम (‘एक हाथ में बा कमल, दोसर में त्रिशूल’), अर्पणा सिंह (‘माँ तू दीपक बनऽ, हम बाती’), वीणा पांडेय ‘भारती’ (‘चुनरिया में शोभा तेरी मैया हमार हो’), पूनम वर्मा (‘जगदंबा घर में दियरा बार अइनी हे’) और बिनोद सिंह गहरवार (‘आहे रउए चरण में मइया, बसे हमरो प्राण हे’) ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्ति का रंग जमाया। वहीं निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने ‘होत पराते कोयलिया बनवा बोले’ तथा सरोज श्रीवास्तव ने ‘बाबा बैद्यनाथ हम आयल छी भिखरिया’ सुनाकर सभी श्रोताओं की भरपूर सराहना बटोरी।
दुर्गा सप्तशती के महत्त्व पर प्रकाश
अपने अध्यक्षीय संबोधन में निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर दुर्गा सप्तशती के महत्त्व पर विस्तार से प्रकाश डाला और उपस्थित सभी कवियों एवं कलाकारों को बधाई व शुभकामनाएँ दीं। अंत में डॉ. उर्मिला सिंह द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस सफल एवं भक्तिमय कार्यक्रम का समापन हुआ।
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