देवघर में अष्टम महागौरी पूजन के बाद खुले मंदिरों और पूजा पंडालों के पट। 105 साल पुरानी बेला बगान दुर्गाबाड़ी, 99वें साल की बरमसिया पूजा, हवामहल और प्रेम मंदिर पंडाल बने मुख्य आकर्षण

तरुण कुमार कंचन,देवघर।

शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी तिथि पर रविवार को बाबाधाम देवघर माँ भगवती के भक्तिमय जयकारों से पूरी तरह गुंजायमान हो उठा। अष्टम महागौरी पूजन के पावन अवसर पर पूरे विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और ढाक की मधुर थाप के बीच शहर के तमाम ऐतिहासिक मंदिरों एवं भव्य पूजा पंडालों के पट श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन के लिए खोल दिए गए। माँ भवानी के अलौकिक स्वरूप का आशीर्वाद पाने और भव्य स्थापत्य कला के दीदार के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।

बाबा वैद्यनाथ मंदिर परिसर में मां दुर्गा की विशेष महाआरती

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सुप्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ मंदिर परिसर स्थित मां दुर्गा के स्थान पर महाअष्टमी के दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान और महाआरती का आयोजन किया गया। पूजनोपरांत जैसे ही मंदिर के द्वार आम श्रद्धालुओं के लिए सुलभ हुए, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के साथ-साथ शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

105 वर्षों की समृद्ध परंपरा का प्रतीक बेला बगान दुर्गाबाड़ी मंदिर

बेला बगान स्थित ऐतिहासिक 'दुर्गाबाड़ी मंदिर' में इस वर्ष 105वें वर्ष की भव्य पूजा आयोजित की जा रही है। एक शताब्दी से भी अधिक पुरानी परंपरा को समेटे इस मंदिर में बांग्ला विधि-विधान और संपूर्ण निष्ठा के साथ मां भगवती की पूजा-अर्चना की जाती है। महाअष्टमी के पावन अवसर पर महागौरी पूजन के बाद जैसे ही मंदिर के पट खुले, दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दीप प्रज्वलित करने और पारंपरिक रूप से खोइछा भरने के लिए देखी गईं।

99वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी बरमसिया की ऐतिहासिक पूजा


देवघर के बरमसिया में आयोजित होने वाली सार्वजनिक दुर्गा पूजा इस वर्ष अपनी 99वीं वर्षगांठ मना रही है। करीब एक सदी पुरानी इस पूजा की भव्यता और परंपरा आज भी अपने आप में अनोखी है। रविवार को महागौरी पूजन के बाद ऐतिहासिक पंडाल के पट खुलते ही दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। परंपरा और आधुनिकता का यह सुंदर संगम देवघर की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रमाण प्रस्तुत कर रहा है। देर रात यहां निशाबली दी गई।

कृष्णानगर में उतरा हवामहल, अद्भुत नक्काशी ने मोहा मन

कृष्णानगर में इस वर्ष निर्मित हवामहल की प्रतिकृति वाला दुर्गा पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई इस भव्य कलाकृति और जगमगाती रोशनी की सजावट को देखने के लिए शहरभर से लोग पहुंच रहे हैं। पट खुलते ही मां दुर्गा के दर्शन के साथ-साथ इस कलात्मक हवामहल को निहारने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। मुझे तो ऐसा लगा कि सबसे ज्यादा भीड़ यहीं है। मंदिर में प्रवेश से निकास तक बहुत अच्छी व्यवस्था रही। 

चांदपुर दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

चांदपुर स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में महागौरी पूजा के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक उल्लास देखने को मिला। स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा से जुड़े इस मंदिर में वैदिक रीति-रिवाज से मां भवानी की पूजा-अर्चना संपन्न हुई। पट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा और भक्तों ने मां महागौरी का पूजन कर क्षेत्र की सुख-शांति की कामना की।

गौशाला परिसर में सात्विकता व सेवा भाव के साथ दुर्गा पूजा

दो साल बाद यहां स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जाएगा। देवघर स्थित गौशाला परिसर में आयोजित दुर्गा पूजा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सेवा भाव और सात्विकता का सुंदर संदेश प्रस्तुत करती है। महाअष्टमी के अवसर पर इस पवित्र परिसर में अत्यंत शांत और भक्तिमय वातावरण के बीच महागौरी का पूजन संपन्न हुआ। पट खुलने के बाद श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया, जहां भक्तों ने मां भवानी के दर्शन के साथ-साथ परिसर के प्राकृतिक और सात्विक वातावरण का लाभ उठाया।

बरनवाल सेवा सदन में भव्य महाआरती व सांस्कृतिक आयोजन

बरनवाल सेवा सदन में आयोजित दुर्गा पूजा अपनी अनूठी सजावट और गरिमामय व्यवस्था के लिए जानी जाती है। महाअष्टमी पर यहां विशेष रूप से भव्य महाआरती और पुष्पांजलि का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पट खुलने के बाद स्थानीय समाज और शहरभर से आए दर्शनार्थियों का मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने के लिए तांता लगा रहा।

अपर बिलासी में बना 'प्रेम मंदिर', मंत्रमुग्ध हो रहे श्रद्धालु

अपर बिलासी में इस बार वृंदावन के प्रसिद्ध 'प्रेम मंदिर' की शैली में बनाया गया भव्य दुर्गा पूजा पंडाल आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। बारीक नक्काशी और रोशनी से जगमगाते इस पंडाल के पट रविवार को महागौरी पूजन के बाद खोल दिए गए। इस अद्भुत कलाकृति में विराजमान मां भगवती के दर्शन के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं का आवागमन जारी रहा।

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