कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कक्षा 9 की छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर लापरवाही का मामला आया सामने। बेहोश छात्रा के साथ अस्पताल नहीं गए शिक्षक, रास्ते में टोटो खराब होने से बढ़ी परेशानी। पढ़ें पूरी खबर


पाकुड़। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, हिरणपुर में प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। मंगलवार शाम कक्षा 9 की एक छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद वह बेहोश हो गई। आरोप है कि ऐसी गंभीर स्थिति में भी विद्यालय प्रबंधन की ओर से कोई भी शिक्षक या कर्मी छात्रा के साथ अस्पताल नहीं गया, जिससे परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब छह बजे विद्यालय प्रबंधन ने कक्षा नौ की छात्रा की तबीयत खराब होने की सूचना उसके परिजनों को दी। सूचना मिलते ही छात्रा की मां सोनामुनि मुर्मू और दीदी पाणमुनि किस्कू तुरंत विद्यालय पहुंचीं।

परिजनों ने बताया कि जब वे विद्यालय पहुंचे, तो छात्रा बेहोश अवस्था में थी। प्रबंधन की ओर से कोई सहायता या वाहन उपलब्ध कराने के बजाय परिजनों को ही अपने स्तर पर टोटो (ई-रिक्शा) से छात्रा को अस्पताल ले जाने को कहा गया।

परिजनों द्वारा बेहोश छात्रा को टोटो से अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में अचानक टोटो की बैटरी (चार्ज) खत्म हो गई। बीच रास्ते में वाहन रुक जाने से परिजनों की घबराहट और बढ़ गई। इसके बाद उन्होंने जबरदाहा में रह रहे अपने अन्य रिश्तेदारों को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने पर दूसरे ऑटो से परिजन मौके पर पहुंचे और किसी तरह छात्रा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) पहुंचाया।

अस्पताल में मौजूद डॉ. सुनील कुमार सिंह ने तुरंत छात्रा की जांच कर उसका इलाज शुरू किया। गनीमत रही कि समय पर इलाज मिलने से छात्रा की स्थिति खतरे से बाहर और स्थिर बताई जा रही है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद हिरणपुर के बीडीओ टुडू दिलीप तुरंत अस्पताल पहुंचे। उन्होंने वहां पहुंचकर डॉक्टर और छात्रा के परिजनों से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली।

इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति (बेहोशी की हालत) में विद्यालय की वार्डेन या कोई अन्य शिक्षक छात्रा के साथ अस्पताल क्यों नहीं गया? नियमों के तहत आवासीय विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी प्रबंधन की होती है।

जब इस संबंध में विद्यालय की वार्डेन वंदना सिंह से संपर्क किया गया, तो उनका बयान विरोधाभासी नजर आया। पहले उन्होंने किसी भी बच्चे के बीमार होने की जानकारी से इनकार किया। हालांकि, कुछ देर बाद उन्होंने स्वीकार किया कि बच्ची की तबीयत खराब होने की सूचना परिजनों को दे दी गई थी और उन्हें बुलाकर छात्रा सुपुर्द कर दी गई थी। वार्डेन के अनुसार, उस वक्त छात्रा को केवल चक्कर आ रहे थे, जबकि परिजन उसे बेहोश हालत में मिलने की बात कह रहे हैं।


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