देवघर में IMA ने उपायुक्त को 10 सूत्री ज्ञापन सौंपा। DACP, डॉक्टर सुरक्षा अधिनियम और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट में सुधार सहित 10 प्रमुख मांगों को लेकर 10 चिकित्सा संगठन एकजुट। पढ़ें पूरी खबर कंचन क्रांति न्यूज पर।

 कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।

झारखंड में चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और स्वास्थ्य कर्मियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) देवघर शाखा ने आज बुधवार को देवघर के उपायुक्त (DC) को एक 10 सूत्री ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन झारखंड संयुक्त चिकित्सा आंदोलन के बैनर तले सौंपा गया, जिसमें राज्य के 10 प्रमुख चिकित्सा संगठनों का समर्थन शामिल है। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में IMA देवघर के अध्यक्ष डॉ. एन. सी. गांधी, सचिव डॉ. संजय कुमार, कोषाध्यक्ष डॉ. गौरीशंकर एवं डॉ. डी. तिवारी प्रमुख रूप से शामिल रहे।

12 अक्टूबर की गूगल मीट में बनी थी आंदोलन की रणनीति

IMA प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि गत 12 अक्टूबर 2026 को IMA, JHASA, AHPI, IMA हॉस्पिटल बोर्ड, जूनियर डॉक्टर और मेडिकल छात्र संगठनों सहित 10 चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन (Google Meet) बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सर्वसम्मति से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया था।

मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए IMA के कोषाध्यक्ष डॉ. गौरीशंकर ने कहा, सबसे बड़ी परेशानी यह है कि दिल्ली के नियम-शर्तें देवघर और अन्य छोटे शहरों पर थोप दी गई हैं। क्षेत्रीय परिस्थितियों को समझे बिना ऐसे नियम लागू करने से डॉक्टरों को काम करने में भारी परेशानी आ रही है। यदि यही स्थिति रही तो स्थानीय चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी और आम जनता का इलाज होना मुश्किल हो जाएगा।

चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी मरीज या स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और कार्यस्थल पर बेहतर माहौल सुनिश्चित करना है, ताकि राज्य की जनता को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

ज्ञापन में शामिल प्रमुख 10 मांगें:

डॉक्टरों की सुरक्षा व संरक्षण: झारखंड चिकित्सा संरक्षण अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन हो और हिंसा की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की जाए। हमेशा डॉक्टरों के कार्यस्थल पर सुरक्षा की चिंता बनी रहती है।

क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट में संशोधन : छोटे क्लीनिकों व अस्पतालों के लिए व्यावहारिक नियम और आनुपातिक नियामक ढांचा बने।

DACP व करियर प्रगति : केंद्र/बिहार मॉडल की तर्ज पर डॉक्टरों और विशेषज्ञों के लिए डायनामिक एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेशन (DACP) लागू हो। यानि झारखंड के सरकारी एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी केंद्र और बिहार के डॉक्टरों की भांति निश्चित समय-सीमा के भीतर सम्मानजनक वेतन वृद्धि और पदोन्नति मिले, ताकि उनका मनोबल बना रहे और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हो।

आयुष्मान भारत (PM-JAY): लंबित भुगतानों का समय पर निपटान और पैकेज-दर से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान हो।

जूनियर डॉक्टरों के मुद्दे: भर्ती प्रक्रिया, संविदात्मक सेवा शर्तों और प्रशिक्षण अवसरों से जुड़ी समस्याओं को दूर किया जाए।

मेडिकल छात्र कल्याण: छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान और मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिले।

दंत डॉक्टरों के लिए DACP: दंत चिकित्सकों के लिए भी DACP लागू किया जाए, रिक्त पदों पर पारदर्शी भर्ती हो तथा NHM डॉक्टरों को प्राथमिकता मिले।

सिंगल विंडो सिस्टम : लाइसेंस, पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी व समयबद्ध बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बने।

महिला डॉक्टरों की सुरक्षा : नाइट शिफ्ट में विशेष सुरक्षा प्रदान की जाए और कार्यस्थल पर उत्पीड़न की रोकथाम के लिए प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित हो।

संयुक्त निगरानी तंत्र : जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और IMA प्रतिनिधियों को मिलाकर नियमित संवाद और समीक्षा तंत्र गठित किया जाए।

रिपोर्ट विकास कुमार

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