नई दिल्ली/संगरूर। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बजरंग दल को लेकर दिए गए विवादित बयान के मामले में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कानूनी शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं। पंजाब की संगरूर जिला अदालत ने बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से करने और उस पर बैन लगाने का वादा करने के खिलाफ दायर 100 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में खड़गे को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस ने कर्नाटक चुनाव के लिए जारी अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह नफरत फैलाने वाले संगठनों जैसे कि बजरंग दल और PFI के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर बैन भी लगाएगी। इस घोषणा पत्र के जारी होने के बाद राजनीतिक घमासान मच गया था। हिंदू सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हितेश भारद्वाज ने इस बयान को बजरंग दल और हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए संगरूर अदालत में 100 करोड़ रुपये का मानहानि का केस दर्ज कराया था।
याचिकाकर्ता की दलील:याचिकाकर्ता के वकील का कहना है:बजरंग दल एक सामाजिक और जनसेवा से जुड़ा संगठन है। इसकी तुलना आतंकी गतिविधियों में शामिल और प्रतिबंधित संगठन PFI से करना पूरी तरह आधारहीन और अपमानजनक है।इस तुलना से देश के करोड़ों बजरंग दल कार्यकर्ताओं और समर्थकों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
चुनावी मुद्दा बना था बजरंग दल बैन का वादा: कर्नाटक चुनावों के दौरान कांग्रेस के इस चुनावी वादे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़ा विरोध जताया था। भाजपा ने इसे भगवान हनुमान और उनके भक्तों का अपमान करार देते हुए पूरे चुनाव में इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाया था। आगे क्या?अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इस मामले में अब कानूनी प्रक्रिया के तहत खड़गे और उनकी कानूनी टीम को कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा।
