नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच शुक्रवार को हुई बातचीत के बाद भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर गतिरोध बरकरार है। सीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मांग पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।
कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब दस मिनट तक बातचीत हुई। बैठक के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका ने बताया कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
सौरभ दास के अनुसार, सरकार आंदोलन से प्रभावित छात्रों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सकारात्मक नजर आई है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के मुद्दे पर भी सरकार का रुख सकारात्मक दिखाई दिया। हालांकि तीसरी मांग पर सरकार ने क्या रुख अपनाया, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।
सीजेपी नेताओं ने कहा कि बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उन्होंने दावा किया कि मीडिया के एक वर्ग में ऐसी खबरें चल रही हैं कि सरकार ने इस विषय पर अंतिम निर्णय के लिए शनिवार शाम तक का समय मांगा है। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बैठक में सीजेपी की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रंका शामिल हुए, जबकि सरकार का प्रतिनिधित्व भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा तथा केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
राहुल गांधी का सरकार पर हमला
इस बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एक घायल प्रदर्शनकारी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि जब एक युवा तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था, तब उस पर पैलेट गन चलाई गई।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन तस्वीरें और घायल छात्रों की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पैलेट गन से हमले में कई युवाओं की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है।
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।
आंदोलन जारी रहने के संकेत
सरकार और सीजेपी के बीच हुई वार्ता के बाद भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में आंदोलन समाप्त होने के बजाय और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य पर टिकी है।
