रामनगर। उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग के कुनखेत क्षेत्र में एक बहू ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए अपनी सास की जान बाघ के जबड़े से बचा ली। जंगल में घास काटने के दौरान बाघ ने बुजुर्ग महिला पर हमला कर दिया, लेकिन बहू ने बिना अपनी जान की परवाह किए दराती से बाघ पर लगातार वार किए। बहू के इस साहसिक कदम से बाघ महिला को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।


जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब नौ बजे कुनखेत निवासी 65 वर्षीय बसंती देवी अपने पुत्रवधू गीता के साथ गांव के पास स्थित एक रिजॉर्ट के समीप जंगल में घास काटने गई थीं। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक बसंती देवी पर हमला कर दिया।


हमले में बसंती देवी के सिर और माथे पर बाघ के पंजों से गहरे घाव हो गए। सास की चीख सुनते ही गीता ने तुरंत दराती उठाई और बाघ पर लगातार प्रहार करने शुरू कर दिए। अचानक हुए इस प्रतिरोध से बाघ घबरा गया और बसंती देवी को छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला।


घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से घायल महिला को पहले रामनगर अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए काशीपुर के अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।


घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। रामनगर वन प्रभाग के एसडीओ अंकित बडोला ने बताया कि घटना स्थल का निरीक्षण किया गया है और इलाके में बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। साथ ही स्थानीय लोगों से जंगल में जाते समय सतर्क रहने की अपील की गई है।


बहू गीता की बहादुरी की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि उसने साहस नहीं दिखाया होता तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।