देवघर में 9 और 10 अक्टूबर को संतालपरगना का पहला दो दिवसीय सैन्य मेला आयोजित होगा। 10 अक्टूबर को उपराष्ट्रपति मेले का समापन करेंगे। सांसद निशिकांत दुबे ने तैयारियों का जायजा लिया।
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा, समर्पण और सुशासन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संतालपरगना को पहली बार सैन्य मेले की सौगात मिलने जा रही है। भारतीय सेना की देखरेख में संतालपरगना प्रमंडल का पहला दो दिवसीय सैन्य मेला 9 और 10 अक्टूबर को देवघर के दर्दमारा स्थित हिंदुजा अस्पताल एवं बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज परिसर में आयोजित किया जाएगा। दो दिवसीय सैन्य मेले का समापन 10 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे भारत के उपराष्ट्रपति करेंगे। आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। मेले में युवाओं को भारतीय सेना से जुड़ने के अवसरों और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी।
सांसद निशिकांत दुबे ने तैयारियों का लिया जायजा

सैन्य मेले की तैयारियों का जायजा लेने के लिए गुरुवार को भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज परिसर पहुंचे। उन्होंने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। सांसद ने कहा कि सैन्य मेला झारखंड समेत संतालपरगना के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आएगा। मेले के माध्यम से युवाओं को भारतीय सेना में करियर और सेना से जुड़ने के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिल सकेगी।
उन्होंने बताया कि आयोजन के दौरान नि:शुल्क चिकित्सा शिविर भी लगाया जाएगा। इसमें जरूरतमंद लोगों की स्वास्थ्य जांच के साथ आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। डॉ. निशिकांत दुबे ने कहा कि देवघर में संतालपरगना के पहले सैन्य मेले का आयोजन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इससे युवाओं में सेना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें सैन्य सेवाओं के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
जनसांख्यिकीय बदलाव और घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया
सैन्य मेले की तैयारियों के निरीक्षण के बाद सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने संतालपरगना में कथित जनसांख्यिकीय बदलाव और घुसपैठ के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने सिदो-कान्हू की ऐतिहासिक धरती को लेकर कहा कि क्षेत्र अपने अधिकारों और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए जन-जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
डॉ. दुबे ने जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए आदिवासी आबादी के अनुपात में कमी और मुस्लिम आबादी के अनुपात में वृद्धि का दावा किया। उनके अनुसार, वर्ष 1951 में संतालपरगना में आदिवासी आबादी करीब 45 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2011 की जनगणना में घटकर लगभग 25 प्रतिशत रह गई। उन्होंने वर्ष 2026 के लिए आदिवासी आबादी करीब 22 प्रतिशत रहने का अनुमान भी व्यक्त किया। इसी तरह सांसद ने दावा किया कि क्षेत्र में मुस्लिम आबादी का अनुपात वर्ष 1951 के करीब 7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2011 में लगभग 24 प्रतिशत हो गया और वर्ष 2026 तक इसके करीब 30 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान है।
डॉ. दुबे ने इन बदलावों के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को जिम्मेदार बताया और कहा कि इससे स्थानीय जल, जंगल, जमीन और संस्कृति पर प्रभाव पड़ रहा है। ये आंकड़े और आरोप सांसद द्वारा दिए गए दावे हैं।
छह जिलों के छात्र संगठनों के साथ बैठक
सांसद ने बताया कि संतालपरगना के सभी छह जिलों देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज और जामताड़ा के छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ गुरुवार को देवघर स्थित उनके आवास शिव धाम में बैठक हुई। उन्होंने बताया कि बैठक में क्षेत्र की जनसांख्यिकी, स्थानीय अधिकारों और इन मुद्दों को लेकर जन-जागरण अभियान की रूपरेखा पर चर्चा की गई। सांसद ने कहा कि सिदो-कान्हू की ऐतिहासिक धरती अपने अधिकारों की रक्षा और जन-जागरण के लिए तैयार है।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों और क्षेत्र में मतदाता सूची को लेकर चल रही गतिविधियों पर भी अपनी आपत्ति व्यक्त की। सांसद ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों के माध्यम से अवैध घुसपैठियों को मतदाता बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह सांसद द्वारा लगाया गया आरोप है।
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