हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म मामले में 3 सिपाही निलंबित और एफआईआर दर्ज। झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई, कोर्ट ने महिला को वापस न भेजने पर सरकार से किए सवाल। जानें पूरी खबर
रांची। झारखंड के हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में एक बांग्लादेशी महिला के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। इस गंभीर मामले में तीन सिपाहियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट को इस कार्रवाई से अवगत कराया।
सुनवाई के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DALSA) की तरफ से अदालत में एक सीलबंद रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में महिला द्वारा लगाए गए आरोपों यानी तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की बात की पुष्टि की गई है। मामले की अगली सुनवाई अब 15 अक्टूबर को होगी, और अदालत ने प्रार्थी से राज्य सरकार के जवाब पर प्रतिउत्तर मांगा है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए महिला को लंबे समय तक हिरासत में रखने पर कई तीखे सवाल किए। अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि जब महिला को वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) के तहत सजा पूरी हो चुकी थी, तो उसे समय पर बांग्लादेश डिपोर्ट (वापस) क्यों नहीं किया गया? डिटेंशन सेंटर में उसे इतने लंबे समय तक रखने की क्या आवश्यकता थी?
इसके अलावा, अदालत ने वर्ष 2025 में महिला पर विदेशी अधिनियम के तहत दोबारा केस दर्ज होने और वर्ष 2026 में उसके बरी होने के बाद सरकार द्वारा अपील न किए जाने पर भी सवाल उठाए।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि महिला को वापस बांग्लादेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से ही विदेश मंत्रालय को लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान मौजूद गृह सचिव ने कोर्ट को तीन कांस्टेबलों के खिलाफ एफआईआर और निलंबन की जानकारी दी। महाधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि एफआईआर में लगी धाराओं की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
यह पूरा मामला एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका के माध्यम से उजागर हुआ था। याचिका में बताया गया कि लोहसिंघना थाने से जुड़े मामले में महिला अदालत से बरी हो चुकी है, इसके बावजूद उसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया। महिला ने सुनवाई के दौरान आरोप लगाया था कि डिटेंशन सेंटर में वर्ष 2020 से 2022 के बीच उसके साथ दुष्कर्म किया गया था।
रिकॉर्ड के अनुसार, महिला के खिलाफ साल 2018 में दो मामले (एक बच्चे के अपहरण और दूसरा विदेशी अधिनियम) दर्ज किए गए थे। अपहरण के मामले में उसे दो साल की सजा हुई, जबकि विदेशी अधिनियम के तहत 2021 में तीन साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उसे डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। वह 2025 में सेंटर से भाग भी गई थी, जिसके बाद नया मामला दर्ज हुआ और 2026 में वह बरी हो गई।
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