देवघर में भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नमन करते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर साधा निशाना, कहा- पीएम मोदी पूरा कर रहे हैं मुखर्जी जी का संकल्प।


कंचन क्रांति ब्यूरो, देवघर।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जिला कार्यालय, देवघर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वें स्मरण पक्ष के तहत एक भव्य कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिला अध्यक्ष सचिन रवानी की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।


सुखमय जीवन छोड़ राष्ट्र सेवा में समर्पित हुए डॉ. मुखर्जी: बाबूलाल मरांडी

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जीवनी और उनके राष्ट्रवादी विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "6 जुलाई को उनकी जन्म जयंती है, जिसे भाजपा कार्यकर्ता हर वर्ष मनाते हैं। डॉ. मुखर्जी एक संभ्रांत परिवार से थे, उनके पिता देश के जाने-माने शिक्षाविद थे। विदेश से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। वह चाहते तो आराम की जिंदगी जी सकते थे, लेकिन उन्होंने राष्ट्र सेवा को सर्वोपरि चुना।"


नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा और जनसंघ की स्थापना

बाबूलाल मरांडी ने डॉ. मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदानों को याद करते हुए कहा:

आजादी की लड़ाई में उनकी सराहनीय भूमिका रही और वे संविधान सभा के सदस्य भी बने।

साल 1947 में नेहरू मंत्रिमंडल में उन्हें उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बनाया गया। उन्होंने ही देश की पहली औद्योगिक नीति लागू की, जिसके तहत चितरंजन रेल कारखाना और सिंदरी फर्टिलाइजर फैक्ट्री स्थापित हुई।

साल 1950 में 'लियाकत समझौते' के विरोध में उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की।


एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस की गलत नीतियों के खिलाफ आंदोलन करते हुए डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर में परमिट सिस्टम का पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने नारा दिया था— एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे। इसी आंदोलन के दौरान कश्मीर कूच करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया और 23 जून 1953 को जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में उनका बलिदान हो गया।

जिस कश्मीर के लिए डॉ. मुखर्जी ने बलिदान दिया, उनका वह संकल्प आज देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा हो रहा है। — बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष

हेमंत सरकार पर कड़ा प्रहार और देवघर में लूट का आरोप

सम्मेलन के दौरान बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। वहीं, पूर्व मंत्री रणधीर सिंह ने भी राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि आज पश्चिम बंगाल और कश्मीर अगर भारत का अभिन्न अंग हैं, तो इसका एकमात्र कारण डॉ. मुखर्जी का बलिदान है। उन्होंने वर्तमान स्थानीय व्यवस्था पर आरोप लगाते हुए कहा कि देवघर जिला में विकास कार्यों के नाम पर लूट मची हुई है, यहाँ बालू और गिट्टी का अवैध खेल धड़ल्ले से चल रहा है।


सम्मेलन में ये रहे उपस्थित

इस बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन में जिलाध्यक्ष सचिन रवानी, पूर्व मंत्री रणधीर सिंह, रीता चौरसिया, संजीव जजवाड़े, विशाखा सिंह, सुनीता सिंह, अभयानंद झा, नवल राय, अधीर चंद्र भैया, पप्पू यादव, पंकज सिंह भदोरिया, विजया सिंह, मुकेश पाठक, संतोष मुर्मू, मनोज मिश्रा, जयकांत मंडल, अलका सोनी, सचिन सुल्तानिया, संतोष उपाध्याय, दिनेश सोनी, महेश राय, संजय यादव, विपिन देव, धनंजय तिवारी, अमनदीप गोलू सहित सभी मंडल अध्यक्ष, मोर्चा पदाधिकारी और सैकड़ों की संख्या में वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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