जमुई के मिर्जा पाठकचक जंगल में पुलिस ने अवैध मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया। संचालक समेत तीन गिरफ्तार, दो जिंदा कारतूस और हथियार बनाने के उपकरण बरामद।
ए. आलम, जमुई।
बिहार के जमुई जिले में अवैध हथियारों के निर्माण और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। सिकंदरा थाना क्षेत्र में पकड़े गए एक संदिग्ध से पूछताछ के बाद पुलिस ने मिर्जा पाठकचक नहर पार घने जंगल में छापेमारी की। यहां कथित तौर पर चोरी-छिपे अवैध हथियार बनाने का काम चल रहा था। पुलिस ने मौके से फैक्ट्री के कथित संचालक, उसके सहयोगी और उस संदिग्ध समेत कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न औजार, कलपुर्जे और .315 बोर के दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
संदिग्ध से पूछताछ में मिला सुराग
पुलिस के अनुसार, 20 अक्टूबर को सिकंदरा थाना कांड संख्या 283/2026 के सिलसिले में छोटू पासवान उर्फ टीनू कुमार (25) को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ के दौरान उसने मिर्जा पाठकचक नहर के पार जंगल में संचालित अवैध हथियार निर्माण केंद्र के बारे में जानकारी दी। इस सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित स्थान पर छापेमारी की। जंगल में की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और कई छोटे-बड़े कलपुर्जे मिले। मौके से दो अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि अवैध हथियार निर्माण का यह काम कब से चल रहा था और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
संचालक और सहयोगी भी गिरफ्तार
पुलिस ने छापेमारी के दौरान कथित मिनी गन फैक्ट्री के संचालक जमशेद अली उर्फ तौफीक मलिक और उसके सहयोगी डब्लू कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने पूरे इलाके की तलाशी लेकर हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाले औजारों और अन्य सामग्रियों को जब्त कर लिया।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान छोटू पासवान उर्फ टीनू कुमार (25), पिता फकीरा पासवान, निवासी मिर्चा, थाना जमुई; जमशेद अली उर्फ तौफीक मलिक, पिता मोहम्मद मुश्ताक, निवासी आमीन, थाना जमुई; और डब्लू कुमार, पिता बौद्धू यादव, निवासी मिर्चा, थाना सिकंदरा के रूप में हुई है।
दो जिंदा कारतूस समेत हथियार बनाने के उपकरण बरामद
पुलिस ने मौके से .315 बोर के दो जिंदा कारतूस के अलावा ड्रिल मशीन, हैंड बेस, मैगजीन फार्मा, 12 साइकिल फार्मा, पांच गोल रेती, एक मैगजीन स्प्रिंग, लोहे की तीन चादरें, 12 हैक्सा ब्लेड, पांच वायर स्प्रिंग और तीन ड्रिल बिट बरामद किए हैं। इसके अतिरिक्त हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई अन्य छोटे-बड़े कलपुर्जे भी जब्त किए गए हैं। बरामद सामग्री से पुलिस को आशंका है कि जंगल में हथियारों के निर्माण के लिए जरूरी उपकरण जुटाए गए थे। हालांकि, मौके से कितने हथियार तैयार किए जा चुके थे और उनका इस्तेमाल या वितरण कहां किया जाना था, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
हथियारों की सप्लाई के नेटवर्क की जांच

मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद पुलिस अब अवैध हथियार निर्माण से जुड़े संभावित नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है। जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि यहां तैयार किए जाने वाले हथियार किन लोगों या आपराधिक गिरोहों तक पहुंचाए जाने थे। साथ ही, यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गतिविधि में अन्य लोग शामिल थे या नहीं। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में अवैध हथियार निर्माण के मामले का खुलासा हुआ है। अब जांच के आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और हथियारों की आपूर्ति के संभावित रास्तों के बारे में जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
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