आयकर विभाग ने पटना के दानपुर स्थित एक सीए की फर्जी फॉर्म 15CB जांच में 500 करोड़ रुपये के संदिग्ध विदेशी लेन-देन का खुलासा किया है। जानें पूरा मामला।


पटना। विदेशों में भेजी गई राशि की देशव्यापी जांच के तहत आयकर विभाग की अन्वेषण इकाई ने पटना के दानापुर स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) गौरव गुंजन पर शिकंजा कसा है। शुरुआती जांच में उनके द्वारा दर्जनों संदिग्ध और फर्जी फॉर्म 15CB जारी करने की बात सामने आई है। विभाग का अनुमान है कि इन प्रमाणपत्रों के जरिए लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये की मुद्रा विदेश ट्रांसफर की गई है।


आयकर विभाग ने देश के प्रमुख शहरों मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद, चेन्नई और पटना में 394 संस्थाओं और 36 पेशेवरों के खिलाफ व्यापक सत्यापन अभियान चलाया है।

सीमावर्ती जिले: जांच के दायरे में आई 117 इकाइयां देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे राज्यों और जिलों में स्थित पाई गई हैं।


कम कारोबार, भारी ट्रांसफर: जांच में कई ऐसी फर्जी (शेल) कंपनियां मिली हैं, जो या तो आईटीआर (ITR) दाखिल नहीं कर रही थीं या उनका घोषित टर्नओवर बेहद कम था।


फर्जी पते और गलत विवरण: ग्राउंड वेरिफिकेशन में कई कंपनियां अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं मिलीं। इसके अलावा, माल ढुलाई (freight charges), सॉफ्टवेयर आयात और कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर किए गए भुगतानों का खातों से कोई स्पष्ट मिलान नहीं हुआ।


जब भी किसी एनआरआई (NRI) या विदेशी संस्था को ₹5 लाख से अधिक का कर-योग्य भुगतान किया जाता है, तब फॉर्म 15CB अनिवार्य होता है।

यह प्रमाणपत्र केवल एक पंजीकृत चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जारी किया जाता है।

इसमें भुगतान का कारण, लागू टीडीएस (TDS) दर, कर कटौती और आयकर प्रावधानों का सटीक विवरण दर्ज होता है।


विभाग अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रहा है कि सीए गौरव गुंजन और अन्य पेशेवरों ने प्रमाणपत्र जारी करने से पहले खातों, बैंक दस्तावेजों और विदेश भेजे गए रेमिटेंस का निष्पक्ष सत्यापन किया था या नहीं। शेल कंपनियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य वित्तीय सहयोगियों की भूमिका की जांच जारी है, जिससे अंतिम वित्तीय आंकड़ा और भी बड़ा होने की संभावना है।