मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और प्रेमी साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी करार दिया है। 15 दिन बाद सजा का ऐलान होगा। पढ़ें पूरी खबर
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में देश को झकझोर कर रख देने वाले सनसनीखेज 'नीला ड्रम हत्याकांड' (Blue Drum Murder Case) में आज बुधवार को जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मुख्य आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को पति सौरभ राजपूत की हत्या, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी करार दिया है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी टिप्पणी की और कहा कि सभ्य समाज (Civilised Society) में इस तरह की क्रूर हरकतों के लिए कोई जगह नहीं है। कोर्ट ने दोनों को सौरभ राजपूत का क्रूर कातिल करार दिया है। इस मामले में अब से 15 दिन बाद यानी अक्टूबर के मध्य में सजा का ऐलान किया जाएगा, वहीं पीड़ित परिवार ने दोनों के लिए फांसी यानी मौत की सजा की मांग की है।
कैसे हुआ था खुलासा?
यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 की रात मेरठ के ब्रह्मपुरी/इंदिरानगर इलाके में हुई थी। मृतक सौरभ राजपूत (लगभग 29 वर्ष) मर्चेंट नेवी में अधिकारी थे और उस समय लंदन से छुट्टी पर अपने घर आए थे। जांच में सामने आया कि सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला के अवैध संबंधों के बीच सौरभ बाधा बन रहा था। इसी के चलते दोनों ने मिलकर खौफनाक साजिश रची। उन्होंने पहले सौरभ को नींद की गोली या नशीला पदार्थ देकर अचेत कर दिया और फिर चाकू या उस्तरे से उसकी निर्मम हत्या कर दी। पहचान छिपाने और शव को ठिकाने लगाने के लिए उन्होंने शव के टुकड़े किए और उन्हें एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट और बालू से सील कर दिया।
घटना के बाद आरोपी फरार होकर हिमाचल प्रदेश भाग गए थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता से वे मार्च 2025 के मध्य में पकड़े गए। पुलिस ने 17 मार्च 2025 के आसपास घर से वह नीला ड्रम बरामद किया था, जिससे इस सनसनीखेज वारदात का पर्दाफाश हुआ था।
लगभग 13 महीने चला ट्रायल, 22 गवाह हुए पेश
इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। इस दौरान अदालत में कुल 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने कोर्ट में पुख्ता फोरेंसिक सबूत, ड्रम, सीमेंट और हत्या में इस्तेमाल चाकू की खरीद के गवाहों के साथ-साथ आरोपियों की मोबाइल लोकेशन जैसी तकनीकी साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने दोनों को सजा का हकदार पाया।
सुनवाई के दौरान दोनों आरोपी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए। अब पूरे देश की नजरें अदालत के उस फैसले पर टिकी हैं जो इस क्रूरता के लिए दोनों को सजा-ए-मौत या उम्रकैद के रूप में सुनाया जाएगा।
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