नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक की घटनाओं को देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए स्पष्ट किया है कि इस तरह के अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देर रात जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है और आने वाले दिनों में इस दिशा में और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक रोकने के लिए अतिरिक्त उपायों पर भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की थी। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई तेजी से हो, ताकि उन्हें जल्द से जल्द कड़ी सजा मिल सके।
सूत्रों के अनुसार, NEET पेपर लीक मामले के आरोपियों पर सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। इसके साथ ही चार राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकारों और हाई कोर्ट से विशेष अदालतों के गठन का अनुरोध करेगी, जहां इन मामलों की रोजाना सुनवाई होगी ताकि जांच और ट्रायल में अनावश्यक देरी न हो।
गौरतलब है कि यह कानून 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, सॉल्वर गैंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग तथा अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने वालों के लिए कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), आईबीपीएस (IBPS), केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों की भर्ती परीक्षाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित सभी प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं पर लागू होता है। चूंकि NEET का आयोजन भी NTA करती है, इसलिए इससे जुड़े पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर भी इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस अधिनियम के तहत अब तक चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इन मामलों की सुनवाई के लिए बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इनमें से दो मामले बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
