नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला और तेज कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, एनसीपी (शरद पवार), बसपा सहित कई विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के संघर्ष की जीत बताया है। विपक्ष का कहना है कि केवल मंत्री के इस्तीफे से मामला खत्म नहीं होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, दोषियों पर कार्रवाई और छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही भी तय करनी होगी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के छात्रों और युवाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक मंत्री की हार नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों की आवाज की जीत है, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर किया गया, उसका निजीकरण बढ़ाया गया और संस्थाओं की स्वायत्तता पर असर पड़ा।
राहुल गांधी ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही था। यह हिंदुस्तान के भविष्य की जीत है।" उन्होंने मांग की कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर भी छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाएगी।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह इस्तीफा नहीं, इंकलाब है।"
आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि यह युवाओं की जीत है और लगातार छात्र आंदोलन तथा जनदबाव के कारण सरकार को झुकना पड़ा। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने इसे लोकतंत्र और छात्रों के संघर्ष की बड़ी जीत बताया।
एनसीपी (शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों और विपक्ष के लगातार दबाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि असली लड़ाई अभी बाकी है और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, जवाबदेही तय करने तथा संसद में नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में जवाबदेही से हमेशा बचा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यह उन छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों की शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ आवाज का परिणाम है, जिन्होंने लगातार न्याय की मांग की।
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि यह छात्रों, युवाओं और विपक्ष की एकजुटता की जीत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी सुधार करेगी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि इससे मौजूदा तनाव कम होने की उम्मीद है और अब संसद के भीतर तथा बाहर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मूल प्रश्नों पर गंभीर चर्चा का रास्ता खुलेगा।
मायावती बोलीं- फैसला पहले होता तो बेहतर रहता
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि छात्रों और युवाओं के आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा देना उचित कदम है, लेकिन यह फैसला पहले ही ले लिया जाता तो बेहतर होता। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। खासकर छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
