बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर का BJP पर बड़ा हमला! जीविका दीदियों के जरिए वोट मांगने और जन सुराज नेताओं को परेशान करने का लगाया आरोप। पीके ने चुनाव आयोग को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम।


·      जन सुराज के नेताओं के होटलों में पुलिस रेड कराने का लगाया आरोप

·      PK बोले— "एक प्रशांत किशोर को हराने के लिए BJP ने उतारे 1000 नेता और मंत्री, यह बांकीपुर के वोटरों की जीत"

·      छात्र आंदोलन पर बड़ा बयान: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बताता है कि देश में विपक्ष मरा नहीं है


कंचन क्रांति ब्यूरो, पटना।

बांकीपुर उपचुनाव को लेकर जन सुराज के सूत्रधार और प्रत्याशी प्रशांत किशोर (PK) ने रविवार को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। पीके ने आरोप लगाया कि बांकीपुर में सरकारी तंत्र और 'जीविका दीदियों' का दुरुपयोग कर भाजपा अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग को 24 घंटे की डेडलाइन देते हुए धरना देने की चेतावनी भी दी।


1000 नेताओं-मंत्रियों की फौज उतारना जनसुराज की जीत

प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में हर दल को प्रचार करने का अधिकार है। भाजपा ने बांकीपुर में एक हजार वर्कर, नेता, मंत्री और सांसद लगा दिए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा:

"जो भाजपा नेता और मंत्री कभी अपने क्षेत्र में नहीं जाते थे, वे आज बांकीपुर की गलियों के चक्कर काट रहे हैं। एक प्रशांत किशोर को हराने के लिए भाजपा को अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ रही है। यह जन सुराज की नहीं, बल्कि बांकीपुर के स्वाभिमानी मतदाताओं की जीत है, जिन्होंने साबित कर दिया कि वे किसी दल के बंधुआ मजदूर नहीं हैं।"

जन सुराज कार्यकर्ताओं के होटलों पर रेड का आरोप

पीके ने आरोप लगाया कि प्रशासन का इस्तेमाल सिर्फ दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा, हमारे जो कार्यकर्ता अपने खर्चे से आकर होटलों में ठहरे हैं, वहां हर दिन पुलिस रेड मार रही है। लेकिन दूसरी तरफ भाजपा के बड़े-बड़े नेता ठहरे हुए हैं, उनसे कोई यह नहीं पूछ रहा कि उनके रहने-खाने का बिल कौन दे रहा है?

जीविका दीदियों के इस्तेमाल पर DM और EC को घेरा

पटना के जिलाधिकारी (DM) के आधिकारिक ट्वीट का जिक्र करते हुए पीके ने कहा कि वोटरों की जागरूकता के नाम पर अर्द्ध-सरकारी कर्मचारियों (जीविका दीदियों) के जरिए भ्रम फैलाया जा रहा है। महिलाओं के बीच जाकर यह डराया जा रहा है कि यदि वे एनडीए को वोट नहीं देंगी तो सरकारी सुविधाएं और राशन-पेंशन बंद कर दी जाएंगी।

पीके ने स्पष्ट कहा: डीएम के सिर्फ ट्वीट डिलीट करने से काम नहीं चलेगा। उन्हें औपचारिक आदेश जारी कर जीविका कर्मियों को चुनाव प्रक्रिया से पूरी तरह अलग करना होगा। आज हम फिर चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर से मिल रहे हैं। यदि 24 घंटे के भीतर जीविका दीदियों को चुनाव कार्य से दूर नहीं किया गया, तो हम सभी आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठेंगे।


विपक्ष कमजोर हो सकता है, लेकिन जनता नहीं

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छात्र आंदोलन पर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वे हर उस आंदोलन के साथ हैं जो सरकार के अलोकतांत्रिक रवैये को चुनौती देता है। उन्होंने कहा कि युवाओं का आक्रोश बेरोजगारी, पेपर लीक और ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर चुटकी लेते हुए कहा कि खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली भाजपा की हेकड़ी तीन दिन में बाहर आ गई। यह बताता है कि भले ही राजनीतिक विपक्षी दल कमजोर हों, लेकिन देश का असली 'विपक्ष' यानी जनता अब शांत बैठने वाली नहीं है। यह तो बस शुरुआत है।

इस दौरान जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, विधानसभा प्रभारी रामबली चंद्रवंशी, पूर्व विधायक किशोर कुमार, सुभाष कुशवाहा, कुमार सौरव, कुमार शांतनु, राकेश पटेल, मसीउद्दीन और संजय ठाकुर समेत कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे।

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