राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पीएम मोदी और सीएम योगी पर तीखा हमला बोला है। जानिए ट्रस्ट के भीतर मचे इस घमासान की पूरी इनसाइड स्टोरी।
एजेंसियां, नई दिल्ली।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और धार्मिक विवाद में तब्दील हो गया है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर से उठी असंतोष की आवाज के बाद, अब देश के प्रतिष्ठित संत और उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने इस पूरे मामले को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिम्मेदार ठहराया है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के बयान के बाद मचा हड़कंप
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि का एक बयान सामने आया, जिसमें मंदिर के भीतर चढ़ावे और प्रबंधन में विसंगतियों की बात कही गई थी। इस खबर के मीडिया में आते ही देश की धार्मिक और राजनीतिक हलकों में सनसनी फैल गई।
शंकराचार्य का तीखा प्रहार: 'धर्मस्थान को स्वार्थ के लिए प्रयोग किया'
स्वामी गोविंद देव गिरि के वक्तव्य पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती '1008' जी महाराज ने सोशल मीडिया पर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सीधे तौर पर देश के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि धर्मस्थानों का उपयोग केवल निजी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया गया है।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया, ट्रस्ट में डाले गए साधु-संत केवल दिखावा थे, वास्तव में उनको भी कोई अधिकार नहीं दिया गया था। सारे अधिकार अपने विश्वस्तों (करीबियों) को सौंप दिए गए थे। उन्होंने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि इस कथित चोरी और कुप्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
बढ़ती जा रही है सियासी और धार्मिक गर्मी
शंकराचार्य के इस बयान के बाद देश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। विपक्ष को जहां सरकार और ट्रस्ट को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है, वहीं आम श्रद्धालुओं के बीच भी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई अन्य संतों ने भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वीआईपी व्यवस्थाओं पर पहले भी सवाल उठाए थे, लेकिन इस बार सीधे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर उंगली उठने से यह विवाद बेहद गंभीर मोड़ पर आ गया है।
समाचार एजेंसियों (ANI, IANS) और प्रमुख मीडिया घरानों के अनुसार, इस विवाद के बाद आने वाले दिनों में राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि मामला सीधे तौर पर करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था और दान से जुड़ा हुआ है।
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