भारत पहुंचने के बाद भी आसान नहीं होती नई जिंदगी, वर्षों तक नागरिकता का रहता है इंतजार
New Delhi. पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न और असुरक्षा के कारण भारत आने वाले हजारों हिंदू परिवारों के लिए सरहद पार करना ही अंतिम मंजिल नहीं होता। असली संघर्ष तो भारत पहुंचने के बाद शुरू होता है, जहां लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी), पहचान संबंधी दस्तावेज और अंततः भारतीय नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया कई वर्षों तक चल सकती है।
पाकिस्तान से आने वाले अधिकांश हिंदू पहले विजिटर वीजा पर भारत पहुंचते हैं। इसके बाद उन्हें तय समय के भीतर स्थानीय प्रशासन के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है। यदि वे किसी दूसरे शहर में रहना चाहते हैं तो उसके लिए भी अलग से अनुमति लेनी पड़ती है।
इसके बाद वे लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) के लिए आवेदन करते हैं, जिसकी मंजूरी मिलने में कई बार लंबा समय लग जाता है।
पाकिस्तान से आए लोगों की मदद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि एलटीवी मिलने तक परिवारों को अनेक व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
एलटीवी मिलने के बाद आधार कार्ड जैसी कुछ सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन उस पर विदेशी नागरिक का उल्लेख होने के कारण बैंक खाते खुलवाने और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में कई बार अतिरिक्त औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं।
नागरिकता की प्रक्रिया इससे भी अधिक लंबी होती है। पहले के नियमों के तहत लोगों को वर्षों तक भारत में रहने के बाद आवेदन करना पड़ता था। आवेदन के बाद सुरक्षा जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही भारतीय नागरिकता मिलती थी। कई परिवारों को नागरिकता मिलने में करीब एक दशक तक का समय लगा।
पाकिस्तान से भारत आए जान बहादुर सिंह बताते हैं कि वे वर्ष 2014 में भारत पहुंचे थे और लगभग दस वर्ष बाद उन्हें भारतीय नागरिकता मिली। वहीं सोभराज भील का कहना है कि लंबे इंतजार के बावजूद भारतीय नागरिकता मिलने के बाद उन्हें स्थायी पहचान और सुरक्षा का एहसास हुआ।
सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप सिंह सोढ़ा के अनुसार, भारत आने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गई है। वीजा के लिए अब अधिक दस्तावेज और उच्च अधिकारियों की मंजूरी की आवश्यकता होती है।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच के बाद ही वीजा जारी किया जाता है। 2019 में थार एक्सप्रेस बंद होने और हाल के वर्षों में भारत-पाकिस्तान सीमा पर आवाजाही सीमित होने से यह प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
हालांकि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने के बाद 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ चुके पात्र हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों के लिए नागरिकता प्राप्त करने का रास्ता आसान हुआ है।
इसके बावजूद 2014 के बाद भारत आए अनेक लोग अब भी मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के तहत नागरिकता मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
पाकिस्तान से आए अधिकांश हिंदू परिवारों का कहना है कि कठिन और लंबी प्रक्रिया के बावजूद भारत में सुरक्षित जीवन और सम्मानजनक भविष्य की उम्मीद ही उनके संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत है।
