देवघर जिले के करों प्रखंड के पथरोल पंचायत भवन पर थाना प्रभारी द्वारा कब्जा करने का मामला सामने आया है। मुखिया ने BPRO को दी सूचना। पढ़ें पूरी खबर।

 

चंदन कुमार ठाकुर, मधुपुर (देवघर)।

 

लोकतंत्र में जिस पंचायत भवन की नींव ग्रामीण जनता की समस्याओं के समाधान, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्राम सभा की बैठकों के लिए लाखों-करोड़ों रुपए की लागत से रखी गई थी, आज वही भवन एक जिम्मेदार अधिकारी के निजी विश्रामगृह में तब्दील हो चुका है। देवघर जिले के करों प्रखंड अंतर्गत आने वाले पथरोल पंचायत भवन का यह मामला पंचायती राज व्यवस्था के मुंह पर एक करारा तमाचा है।

सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2024 से लगातार पथरोल थाना प्रभारी इस पंचायत भवन के कमरों का इस्तेमाल अपने निजी आवास की तरह कर रहे हैं। खाकी वर्दी के रौब और प्रभाव के आगे जनता का यह भवन पूरी तरह बंधक बन चुका है। इस पूरे प्रकरण ने जिला प्रशासन, पुलिस महकमे और पंचायती राज विभाग की कार्यशैली व नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिना किराए की शाही रिहाइश और कई बड़े सवाल

 यदि पंचायत कोष में एक भी रुपया जमा किए बिना थाना प्रभारी वहां रह रहे हैं, तो क्या यह सीधे तौर पर अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग कर जबरन कब्जा करने की श्रेणी में नहीं आता?

सरकारी नियमानुसार प्रत्येक शासकीय सेवक को या तो मकान किराया भत्ता दिया जाता है या सरकारी आवास आवंटन के एवज में उसके वेतन से कटौती होती है। सवाल यह उठता है कि क्या पथरोल थाना प्रभारी का HRA कट रहा है, या वे जनता के पैसों से बने भवन में मुफ्त रिहाइश का लुत्फ उठा रहे हैं? यह मामला सीधे-सीधे वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।

मुखिया बद्रीनारायण शाह का बयान: BPRO को दी जा चुकी है सूचना

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब पथरोल पंचायत के वर्तमान मुखिया बद्रीनारायण शाह से बात की गई, तो उनका जवाब प्रशासनिक व्यवस्था की लाचारी और पोल खोलने वाला था।

मुखिया बद्रीनारायण शाह ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) को फोन के माध्यम से दे दी है और प्रशासन को वस्तुस्थिति से पूरी तरह अवगत करा दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मुखिया द्वारा आधिकारिक सूचना दिए जाने के बावजूद महीनों से इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या पंचायती राज विभाग और पुलिस प्रशासन एक-दूसरे की कमियों पर पर्दा डालने के खेल में शामिल हैं?

 पथरोल पंचायत की जनता में इस मनमानी और तानाशाही रवैये को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द पंचायत भवन को अवैध कब्जे से मुक्त नहीं कराया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने और सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

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