नई दिल्ली: नीट पेपर लीक आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल अभिजीत दिपके ने साफ किया है कि उनका समूह फिलहाल किसी राजनीतिक दल में तब्दील नहीं होगा, बल्कि शिक्षा, बेरोज़गारी और व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर जनता की आवाज़ बनकर काम करेगा। हालांकि उनके हालिया बयान यह संकेत भी देते हैं कि छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहकर व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है।

दिपके का सबसे बड़ा आरोप यह है कि संसद से पारित पेपर लीक संशोधन कानून का फोकस पेपर लीक रोकने पर नहीं, बल्कि घटना के बाद की कार्रवाई पर अधिक है। उनका कहना है कि सरकार की प्राथमिकता निवारक व्यवस्था बनाने के बजाय दंड बढ़ाने तक सीमित दिखती है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को मुआवजा, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और संस्थागत सुधारों की मांग भी दोहराई।

साक्षात्कार के दौरान दिपके ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सवाल उठाए, आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की और कहा कि यदि सरकार ने छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन फिर तेज किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी राजनीतिक दल के इशारे पर नहीं चला और भविष्य में भी वे राजनीतिक पार्टी बनाने या किसी दल में शामिल होने की योजना नहीं रखते। उनके मुताबिक, यह "रिस्पॉन्स ग्रुप" जनता के मुद्दों को उठाने का मंच रहेगा।