झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का विधानसभा मार्च जारी। बीजेपी नेता तरुण चुघ ने राहुल गांधी के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार को घेरा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
नई दिल्ली/रांची। झारखंड में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के विरोध में छात्रों का आंदोलन 17वें दिन और उग्र हो गया है। हजारों की संख्या में नौकरी के अभ्यर्थी सोमवार सुबह धुर्वा स्थित पुराने विधानसभा परिसर से नए विधानसभा भवन की ओर मार्च करने के लिए सड़कों पर उतरे। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने केंद्र में विपक्षी दल कांग्रेस और राहुल गांधी पर "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है।

आंदोलन का मुख्य चेहरा और जेएलकेएम (JLKM) नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो पिछले नौ दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद एंबुलेंस में बैठकर मार्च में शामिल हुए। भूख हड़ताल के कारण उनका वजन लगभग 10.5 किलोग्राम कम हो चुका है। मार्च के दौरान वे पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर हाथ में लिए नजर आए। छात्रों के हाथों में तिरंगा और तख्तियां थीं, जिन पर परीक्षा प्रणाली में सुधार और धांधली की जांच की मांग लिखी हुई थी।

संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। चुघ ने कहा:
"जो लोग दिल्ली में छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रूप से हाईजैक करने की कोशिश कर रहे थे, जो कभी बसों में बैठते थे तो कभी पदयात्रा निकालते थे, वे सो-कॉल्ड नेता अब कहां हैं? राहुल गांधी के पास झारखंड के छात्रों की बात सुनने का समय नहीं है क्योंकि वहां उनकी सहयोगी पार्टी की सरकार है।"

तरुण चुघ ने तंज कसते हुए कहा कि अब कांग्रेस नेताओं के पास ऐसी कोई बस नहीं बची है जिससे वे राजघाट जाकर विरोध प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने इसे कांग्रेस का स्पष्ट "दोहरा रवैया" करार दिया।
बीजेपी नेता ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है और 'सत्याग्रह' देश की ताकत है। हालांकि, उन्होंने आंदोलनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि किसी भी स्थिति में कानून को हाथ में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों की मांगों को सुने और उनका जल्द से जल्द समाधान निकाले।
