धनबाद। झारखंड की राजनीति से मंगलवार को एक महत्वपूर्ण और दुखद खबर सामने आई। राज्य के पूर्व मंत्री, धनबाद के पूर्व विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मन्नान मलिक का निधन हो गया। वे पिछले कई महीनों से गंभीर रूप से अस्वस्थ थे और रांची के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ धनबाद के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।


मन्नान मलिक लंबे समय से सक्रिय राजनीति का अहम चेहरा रहे। उन्होंने धनबाद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। अपने राजनीतिक जीवन के दौरान वे कांग्रेस के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में गिने जाते थे और धनबाद की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी।


उनका निधन ऐसे समय हुआ है, जब दो दिन पहले ही उन्हें बहुचर्चित मटकुरिया गोलीकांड मामले में अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद हिरासत में लिया गया था। हालांकि, उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनका इलाज रांची में चल रहा था। बीमारी के कारण वे लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों से भी दूर थे।


मन्नान मलिक का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और धनबाद समेत आसपास के क्षेत्रों में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए लगातार सक्रिय रहे। उनके समर्थकों का कहना है कि वे जनता के बीच रहने वाले नेता थे और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को हमेशा प्राथमिकता देते थे।


उनके निधन की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और उनके समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया। कई नेताओं ने इसे झारखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। सोशल मीडिया पर भी उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू हो गया है।


मन्नान मलिक के निधन के साथ ही उनके राजनीतिक जीवन और हाल के कानूनी घटनाक्रम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। मटकुरिया गोलीकांड में दोषसिद्धि के बाद उनका निधन इस मामले को भी नए संदर्भ में चर्चा का विषय बना सकता है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी।


फिलहाल उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए धनबाद लाए जाने की तैयारी की जा रही है। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों के शामिल होने की संभावना है। उनके निधन से झारखंड की राजनीति में एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसने लंबे समय तक धनबाद और राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया