राज्य सरकार को छह महीने में अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का आदेश, केंद्र को जमीन मिलने के दो साल के भीतर केंद्रीय विद्यालय शुरू कराने का निर्देश

कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।

देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को देवघर एम्स में बिजली, पानी, अग्निशमन सहित अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं छह महीने के भीतर सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। वहीं, एम्स कर्मियों के बच्चों की शिक्षा के लिए केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के मामले में केंद्र सरकार को भी समयसीमा के साथ आगे बढ़ने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि केंद्रीय विद्यालय के निर्माण के लिए राज्य सरकार की ओर से 20 एकड़ जमीन उपलब्ध कराए जाने के दो वर्षों के भीतर केंद्र सरकार इसका संचालन सुनिश्चित करे। अदालत ने जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार को छह महीने के भीतर निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मामले में आगे की सुनवाई के लिए 13 मई 2027 की तिथि निर्धारित की गई है।

बिजली, पानी और अग्निशमन व्यवस्था दुरुस्त करने पर जोर

दरअसल, गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने देवघर एम्स में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और संस्थान के समुचित संचालन से जुड़ी समस्याओं को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में एम्स जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई थी।

याचिका में प्रमुख रूप से एम्स परिसर में निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था करने, पुनासी डैम से लगातार जलापूर्ति सुनिश्चित करने और अग्निशमन की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इसके अलावा एम्स की जमीन से अतिक्रमण हटाने तथा संस्थान तक बेहतर रेल संपर्क और आवागमन की सुविधा के लिए रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कराने का मुद्दा भी उठाया गया था।

केंद्रीय विद्यालय और रेलवे ओवरब्रिज का मुद्दा भी उठा

जनहित याचिका में एम्स में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा की सुविधा का भी मुद्दा उठाया गया था। इसके लिए परिसर के आसपास केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की मांग की गई थी। याचिका में विद्यालय निर्माण के लिए 20 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई थी। हाईकोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार को जमीन मिलने के दो वर्षों के भीतर विद्यालय का संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान सांसद डॉ. निशिकांत दुबे की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विभोर मयंक ने पैरवी की।

हाईकोर्ट के इस निर्देश को देवघर एम्स की आधारभूत सुविधाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब राज्य सरकार के सामने निर्धारित छह महीने के भीतर बिजली, पानी, अग्निशमन और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी। वहीं, केंद्रीय विद्यालय के संचालन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच जमीन उपलब्ध कराने तथा आगे की प्रक्रिया पूरी करने पर नजर रहेगी।

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