जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव विजय झा ने खोले देवघर क्रिकेट के 25 वर्षों के सफर के पन्ने, बोले- प्रतिभा और मेहनत की कमी नहीं, बस एक बड़े अवसर का इंतजार
तरुण कुमार कंचन, देवघर।
बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है। खेल के मैदान पर भी यह जिला अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खासकर क्रिकेट के क्षेत्र में पिछले करीब ढाई दशक के दौरान जिस तरह खिलाड़ियों, टीमों और क्रिकेट अकादमियों का विस्तार हुआ है, वह देवघर के खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आज जिले में 71 टीमें जिला क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ी हैं। इनमें अधिकांश टीमें ग्रामीण क्षेत्रों की हैं। इतना ही नहीं, महिला क्रिकेट में देवघर की खिलाड़ियों ने अंडर-15, अंडर-19 और अंडर-23 तीनों आयु वर्गों में राज्य स्तरीय चैंपियन बनकर जिले को गौरवान्वित किया है।
हालांकि, उपलब्धियों के इस सफर के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं। जिले में क्रिकेट के लिए उपयुक्त मैदान की कमी, खिलाड़ियों के नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था और बेहतर खेल सुविधाओं का विकास आज भी बड़े सवाल हैं। जिला क्रिकेट एसोसिएशन के गठन के समय से ही संगठन से जुड़े रहे और पिछले करीब 25 वर्षों से देवघर में क्रिकेट गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे विजय झा ने बातचीत में जिले की उपलब्धियों, संभावनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
71 टीमों तक पहुंचा देवघर का क्रिकेट, ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ा खेल का दायरा
विजय झा के अनुसार, देवघर जिला क्रिकेट एसोसिएशन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में जिले में क्रिकेट का व्यापक विस्तार शामिल है। आज जिले में 71 टीमें एसोसिएशन से जुड़ी हैं और जिला लीग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं। इनमें लगभग 10 टीमें देवघर शहरी क्षेत्र की हैं, जबकि शेष टीमें ग्रामीण इलाकों से आती हैं।
इससे स्पष्ट है कि क्रिकेट अब केवल शहरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित नहीं रह गया है। गांवों के युवा भी इस खेल में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। एसोसिएशन को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाले खिलाड़ी राज्य स्तरीय टीमों में अपनी जगह बनाएंगे।
झारखंड की सीनियर टीम तक पहुंची देवघर की प्रतिभा
देवघर के क्रिकेट खिलाड़ियों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए विजय झा ने बताया कि हर साल जिले के तीन से पांच खिलाड़ी विभिन्न आयु वर्गों के राज्य स्तरीय कैंप में जगह बनाते रहे हैं। इनमें अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 वर्ग के खिलाड़ी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में देवघर के तीन खिलाड़ी झारखंड की सीनियर टीम के रणजी क्रिकेट ढांचे से जुड़े हैं। उनके अनुसार सौरभ शेखर, प्रत्युष कुमार और शिवम कुमार जिले के उभरते क्रिकेटरों में शामिल हैं। सौरभ शेखर और प्रत्युष कुमार को लेकर उन्होंने विशेष रूप से बताया कि वे राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं।
हालांकि, देवघर का कोई खिलाड़ी अब तक भारतीय क्रिकेट टीम या आईपीएल तक नहीं पहुंच पाया है। कुछ खिलाड़ियों को आईपीएल से जुड़े चयन और ट्रायल की प्रक्रिया में अवसर जरूर मिला। विजय झा ने बताया कि शुभम और प्रतीक को गेंदबाजी सत्र के लिए बुलाया गया था।
प्रतिभा की कमी नहीं, बड़े मंच पर प्रदर्शन का इंतजार
जब उनसे पूछा गया कि देवघर के खिलाड़ियों को अब तक भारतीय टीम या आईपीएल में जगह क्यों नहीं मिल पाई है, तो उन्होंने इसे केवल संसाधनों की कमी से जोड़कर देखने से इनकार किया।
विजय झा का कहना था कि क्रिकेट में प्रतिभा और मेहनत के साथ सही समय पर अवसर और किस्मत का साथ भी जरूरी है। उनके मुताबिक देवघर के खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है और न ही उन्हें बुनियादी सुविधाओं के स्तर पर किसी तरह की कमी महसूस होने दी जाती है। जरूरत है कि कोई खिलाड़ी बड़े मंच पर असाधारण प्रदर्शन करे और उसे आगे बढ़ने का अवसर मिले।
महिला क्रिकेट में देवघर का ऐतिहासिक प्रदर्शन, तीनों आयु वर्गों में चैंपियन
देवघर क्रिकेट की उपलब्धियों में महिला क्रिकेट का प्रदर्शन सबसे उल्लेखनीय रहा है। विजय झा ने बताया कि पिछले सत्र में जिले की महिला टीम ने अंडर-15, अंडर-19 और अंडर-23 तीनों आयु वर्गों में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया था। उनके अनुसार, एक ही सत्र में तीनों आयु वर्गों में चैंपियन बनना देवघर के लिए बड़ी उपलब्धि है। महिला खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी खेल सामग्री, पूरी किट और अभ्यास की सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
लड़कियों के अभ्यास के लिए स्टेडियम के बाहर अलग व्यवस्था की गई है। कई खिलाड़ी वहां नियमित अभ्यास करती हैं, जबकि कुछ लड़कियां लड़कों की टीम के साथ भी प्रशिक्षण लेती हैं। एसोसिएशन का प्रयास है कि महिला खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतियोगिताओं में किसी तरह की असुविधा न हो।
आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों और अकादमियों को भी मदद
क्रिकेट में प्रतिभा अक्सर आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण पीछे छूट जाती है। इस चुनौती को लेकर विजय झा ने बताया कि एसोसिएशन की ओर से खिलाड़ियों को जरूरत के अनुसार मैदान और खेल सामग्री उपलब्ध कराने की नीति है। आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को भी अभ्यास से वंचित नहीं रहने देने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने बताया कि जिले की क्रिकेट अकादमियों को भी जरूरत पड़ने पर एसोसिएशन की ओर से मदद दी जाती है। यदि किसी अकादमी को रोलर, कटर या अन्य जरूरी उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता चाहिए तो एसोसिएशन कर्ज के रूप में सहयोग कर सकता है। यह सहायता अनुदान नहीं, बल्कि वापस की जाने वाली राशि के रूप में दी जाती है।
देवघर में देवघर क्रिकेट अकादमी (डीसीए), सोनेट क्रिकेट अकादमी, अंगद क्रिकेट अकादमी और रईस क्रिकेट अकादमी सहित कई संस्थान क्रिकेट प्रशिक्षण में सक्रिय हैं। विजय झा ने किसी एक अकादमी को सर्वश्रेष्ठ बताने से परहेज किया। उनका कहना था कि अलग-अलग अकादमियों से लगातार प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आ रहे हैं और किसी एक को सर्वश्रेष्ठ कहना उचित नहीं होगा।
चयन से लेकर प्रशिक्षण तक अपनाई जाती है प्रक्रिया
जिला टीम के चयन की प्रक्रिया के बारे में उन्होंने बताया कि जिला लीग प्रतियोगिता में सभी टीमों और खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाता है। लीग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को छांटकर दो टीमें बनाई जाती हैं। इसके बाद दोनों टीमों के बीच मुकाबला कराया जाता है। इस प्रदर्शन के आधार पर जिला टीम के लिए खिलाड़ियों का चयन किया जाता है।
चयन के बाद खिलाड़ियों के लिए कैंप आयोजित किया जाता है, जहां उन्हें प्रशिक्षण और अभ्यास का अवसर मिलता है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए भी खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के अनुरूप तैयार किया जाता है। हालांकि, जिले में स्थायी रूप से समर्पित कोचिंग व्यवस्था की कमी है। विजय झा के अनुसार, विशेष प्रशिक्षण शिविरों के दौरान स्थानीय और बाहर से आने वाले कोचों की सेवाएं ली जाती हैं।
केकेएन स्टेडियम की बदहाली और सरकारी आयोजनों से क्रिकेट को नुकसान
देवघर में क्रिकेट के विकास की सबसे बड़ी बाधा के रूप में विजय झा ने उपयुक्त खेल मैदान की कमी को रेखांकित किया। उनका कहना था कि केकेएन स्टेडियम में नियमित क्रिकेट मैच आयोजित करना मजबूरी है, क्योंकि शहर में दूसरा बेहतर विकल्प उपलब्ध नहीं है। लेकिन मौजूदा मैदान क्रिकेट के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है।
उन्होंने बताया कि स्टेडियम में घास की कमी है। इसके अलावा सरकारी कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों के दौरान मैदान में गड्ढे हो जाते हैं तथा नुकीली वस्तुएं और अन्य अवरोध रह जाते हैं। बाद में क्रिकेट मैच कराने के लिए एसोसिएशन को ही मैदान की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। जिला प्रशासन के समक्ष इस समस्या को कई बार उठाया गया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से भी शहर में पर्याप्त वैकल्पिक मैदान नहीं होने की बात कही जाती है।
विजय झा ने वर्ष 2025 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि महिला क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान मैदान में बने गड्ढे में पैर चले जाने से एक खिलाड़ी का पैर टूट गया था। यह घटना मैदान की स्थिति और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उनका मानना है कि खिलाड़ियों को सुरक्षित और बेहतर मैदान उपलब्ध कराना जरूरी है, क्योंकि मैदान की खराब स्थिति सीधे तौर पर उनके अभ्यास और प्रदर्शन को प्रभावित करती है।
चटर्जी मैदान को बताया क्रिकेट के लिए बेहतर विकल्प
केकेएन स्टेडियम के अलावा जसीडीह स्थित चटर्जी मैदान को लेकर विजय झा ने कहा कि क्रिकेट खेलने के लिहाज से यह मैदान उन्हें केकेएन स्टेडियम से बेहतर लगता है। एसोसिएशन वहां भी क्रिकेट गतिविधियां आयोजित कर रहा है।
उन्होंने बताया कि एसोसिएशन शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर रंगा मोड़ के पास एक अन्य मैदान को विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। वहां मैदान तैयार करने का काम चल रहा है और उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले 15 दिनों के भीतर इसे मैच कराने लायक बना लिया जाएगा। इसके बाद बड़े मुकाबलों के आयोजन के लिए भी एक बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।
15 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा देवघर प्रीमियर लीग
देवघर में क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने और स्थानीय खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक मंच देने में देवघर प्रीमियर लीग (डीपीएल) की भी अहम भूमिका रही है।
विजय झा के अनुसार, डीपीएल पिछले 15 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इसे जिले की एक विशिष्ट खेल परंपरा बताते हुए कहा कि प्रतियोगिता का आयोजन आईपीएल की तर्ज पर किया जाता है। इसमें फ्रेंचाइजी आधारित टीमें बनाई जाती हैं और खिलाड़ियों की बोली लगाई जाती है। टीमों का खर्च और प्रबंधन संबंधित फ्रेंचाइजी संभालती हैं। प्रतियोगिता में नाइट मैच भी आयोजित किए जाते हैं तथा खिलाड़ियों को पुरस्कार दिए जाते हैं।
उनका मानना है कि इस तरह की प्रतियोगिताएं स्थानीय खिलाड़ियों को बड़े स्तर के क्रिकेट का अनुभव देती हैं और जिले में क्रिकेट के प्रति उत्साह बनाए रखती हैं।
अगले तीन वर्षों की चुनौती

विजय झा की बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि देवघर में क्रिकेट का आधार लगातार मजबूत हुआ है। 71 टीमों का जुड़ाव, ग्रामीण क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी, राज्य स्तरीय टीमों तक खिलाड़ियों की पहुंच और महिला क्रिकेट की उपलब्धियां इस विस्तार की गवाही देती हैं।
लेकिन अब चुनौती केवल टीमों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को बेहतर मैदान, नियमित कोचिंग, सुरक्षित अभ्यास स्थल और उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं का अवसर उपलब्ध कराने की है। देवघर जिला क्रिकेट एसोसिएशन की आगामी प्राथमिकताओं में नया मैदान विकसित करना और खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल वातावरण तैयार करना शामिल है। यदि मैदान और प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत होती है तो देवघर की क्रिकेट प्रतिभाओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अधिक अवसर मिल सकता है।
फिलहाल देवघर क्रिकेट एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उपलब्धियां उम्मीद जगाती हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियां आगे की राह तय करेंगी। जिले के क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि 71 टीमों के इस मजबूत आधार से अगला बड़ा खिलाड़ी कब निकलता है, जो देवघर का नाम राष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर रोशन करे।