देवघर के एसएफसी गोदाम में भौतिक सत्यापन के दौरान 22,007.37 क्विंटल चावल और गेहूं का हिसाब नहीं मिला। तत्कालीन सहायक गोदाम प्रबंधक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
- भौतिक सत्यापन में हुआ खुलासा, कुंडा थाने में दिया आवेदन
- 19,164.25 क्विंटल चावल और 2,843.12 क्विंटल गेहूं का नहीं मिला हिसाब
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।
देवघर के बाजार समिति स्थित राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के गोदाम में सरकारी खाद्यान्न के स्टॉक में भारी अंतर सामने आया है। जांच के दौरान 22,007.37 क्विंटल चावल और गेहूं का हिसाब नहीं मिलने के बाद तत्कालीन सहायक गोदाम प्रबंधक कोमल कुमार पाठक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रीतिलता किस्कू ने 26 अक्टूबर 2026 को कुंडा थाना प्रभारी को आवेदन देकर मामले में कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया।
विभागीय आवेदन के अनुसार, गोदाम के ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज खाद्यान्न की मात्रा और भौतिक सत्यापन के दौरान उपलब्ध स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया। जांच में 19,164.25 क्विंटल चावल और 2,843.12 क्विंटल गेहूं का हिसाब नहीं मिला। इस प्रकार कुल 22,007.37 क्विंटल खाद्यान्न की उपलब्धता का मिलान नहीं हो सका। विभाग ने इसे सरकारी खाद्यान्न के कथित गबन और वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला बताया है।
आवेदन में तत्कालीन सहायक गोदाम प्रबंधक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
संयुक्त जांच दल ने 15 अक्टूबर को किया था निरीक्षण
जिला आपूर्ति पदाधिकारी के आवेदन के मुताबिक, बाजार समिति स्थित एसएफसी गोदाम में डीएसडी की कम प्रगति के कारणों की गहन जांच के लिए संयुक्त जांच दल का गठन किया गया था। इस दल ने 15 अक्टूबर 2026 को गोदाम का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान सरकारी पोर्टल पर दर्ज खाद्यान्न के स्टॉक का गोदाम में भौतिक रूप से उपलब्ध अनाज से मिलान किया गया। इस प्रक्रिया में ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़ा अंतर सामने आया। इसके बाद विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध खाद्यान्न का अलग-अलग हिसाब तैयार किया गया।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर विभाग ने तत्कालीन सहायक गोदाम प्रबंधक कोमल कुमार पाठक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। विभाग का आरोप है कि सरकारी पोर्टल पर खाद्यान्न का स्टॉक उपलब्ध दिखाया जा रहा था, जबकि भौतिक सत्यापन के दौरान संबंधित मात्रा में अनाज गोदाम में नहीं मिला।
स्टॉक, बिक्री और आवक पंजी नहीं देने का भी आरोप
मामले में गोदाम के अभिलेखों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आवेदन के अनुसार, स्टॉक पंजी, बिक्री पंजी और आवक पंजी प्रस्तुत नहीं किए जाने का आरोप है। इन अभिलेखों के माध्यम से गोदाम में खाद्यान्न की आवक, वितरण और शेष उपलब्धता का मिलान किया जाता है।
ऐसे में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और ऑनलाइन स्टॉक तथा वास्तविक भंडार में अंतर मिलने से खाद्यान्न के रखरखाव और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी खाद्यान्न की कमी की पूरी तस्वीर
एसएफसी गोदाम में सामने आई इस कमी ने सरकारी खाद्यान्न के भंडारण और लेखा-जोखा व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। अब मामले की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि खाद्यान्न की कमी किन परिस्थितियों में हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक तथा भौतिक भंडार के बीच अंतर कैसे उत्पन्न हुआ।
प्राथमिकी के बाद पुलिस और संबंधित विभाग की जांच में उपलब्ध अभिलेखों, खाद्यान्न की आवक-जावक तथा वितरण संबंधी विवरण की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
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