देवघर श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं की सेहत से खिलवाड़! 1060 किलो संदिग्ध खोया सील, चाट और रेस्टोरेंट के खाने में मिला घातक मेटानिल येलो रंग। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।


तरुण कुमार कंचन, देवघर।

विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेले में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। मेला क्षेत्र के प्रसिद्ध होटलों और चाट-पकौड़ी की दुकानों में मिलावटी और खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा की गई हालिया छापेमारी ने व्यवस्था और दुकानदारों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


प्रसिद्ध पेड़ा मंडी में औचक निरीक्षण

घोरमारा और मोहनपुर स्थित 'ओम जी पेड़ा शॉप' के औचक निरीक्षण के दौरान लगभग 1,060 किलोग्राम (10 क्विंटल से अधिक) संदिग्ध खोया बरामद किया गया। खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरने के कारण विभाग ने पूरे खेप को सील कर दिया है और सैंपल जांच के लिए लैब भेजे हैं। बड़ा सवाल यह है कि मेले के पीक सीजन में इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध खोया बाजार तक कैसे पहुँच गया और इससे पहले कितना खोया श्रद्धालुओं को परोसा जा चुका है?


चाट-पकौड़ी और रेस्टोरेंट में खतरनाक केमिकल

जांच अभियान के दौरान मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब ने जो खुलासे किए हैं, वे डराने वाले हैं:

 रॉफ टॉप रेस्टोरेंट: यहाँ हल्दी पाउडर में कपड़ा रंगने वाला प्रतिबंधित केमिकल 'मेटानिल येलो' (Metanil Yellow) पाया गया। साथ ही रसोई से एक्सपायरी सूजी भी बरामद हुई।

 विक्रम चाट भंडार और बसुकी पकौड़ी चाट: आम श्रद्धालुओं की पसंदीदा चाट और घुघनी में भी खतरनाक मेटानिल येलो रंग की मिलावट पाई गई।

कार्रवाई के नाम पर विभाग ने मौके पर केवल 5 किलो पकौड़ी और एक्सपायरी सामान नष्ट कराकर औपचारिकता पूरी की, जबकि ऐसे खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल पर सख्त एफआईआर (FIR) दर्ज होनी चाहिए थी।

कैसे बचेगी आम लोगों की सेहत?

अभियान के तहत मधुबन होटल,  माधुरी होटल, सिंध होटल, होटल नीलकमल और कार्तिक फूड प्लाज़ा जैसे दर्जनों प्रतिष्ठानों की जांच की गई। हालांकि वेदा इन और होटल राज में व्यवस्था ठीक पाई गई, लेकिन मेले के दौरान बड़े-बड़े रेस्टोरेंट से लेकर सड़क किनारे बिकने वाले चाट-समोसों में जिस तरह का मिलावटी खाना मिल रहा है, वह प्रशासनिक मुस्तैदी के दावों की पोल खोलता है।

हर साल मेले के दौरान विभाग ऐसी ही सांकेतिक (रूटीन) कार्रवाइयां करता है, लेकिन मिलावटखोरों पर कोई स्थायी नकेल नहीं कस पाती। जब तक मिलावट करने वालों के लाइसेंस रद्द कर उन पर जेल भेजने जैसी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक लाखों श्रद्धालुओं की सेहत पर यह खतरा मंडराता रहेगा।

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