नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में 2018 के चर्चित एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एक अहम घटनाक्रम सामने आया। न्यायमूर्ति एस. चंद्रशेखर ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग (Recuse) कर लिया। हालांकि उन्होंने अपने इस फैसले का कोई कारण नहीं बताया।


गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एस. चंद्रशेखर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी। जैसे ही मामला सुनवाई के लिए आया, न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने स्वयं को मामले से अलग करने की घोषणा कर दी। इसके बाद पीठ ने निर्देश दिया कि मामले को उचित आदेश के लिए भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के समक्ष रखा जाए, ताकि इसे किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सके।


क्या है सुरेंद्र गाडलिंग का पक्ष?

सुरेंद्र गाडलिंग की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। गाडलिंग लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और उन्होंने अपनी लंबी कैद तथा मुकदमे की धीमी प्रगति का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगी है।


क्या है एल्गार परिषद मामला?

यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन से जुड़ा है। अगले दिन 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव विजय स्तंभ के पास हिंसा भड़क गई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए।


पुलिस ने जांच के दौरान दावा किया कि एल्गार परिषद कार्यक्रम के तार प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े हुए थे और कार्यक्रम के माध्यम से कथित रूप से भड़काऊ गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। बाद में इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई।


किन धाराओं में दर्ज है मामला?

सुरेंद्र गाडलिंग सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और वकीलों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों ने जांच एजेंसियों के आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।


पहले भी कई आरोपियों को मिली है राहत

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट समय-समय पर कुछ आरोपियों को नियमित या अंतरिम जमानत दे चुके हैं। वहीं कई अन्य आरोपी अब भी जेल में हैं और उनकी जमानत याचिकाएं विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।


अब आगे क्या होगा?

न्यायमूर्ति एस. चंद्रशेखर के स्वयं को अलग करने के बाद अब यह मामला भारत के प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा। सीजेआई के निर्देश के बाद सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए नई पीठ गठित की जाएगी। तब तक उनकी जमानत याचिका पर कोई फैसला नहीं होगा।