जमशेदपुर (झारखंड) के श्यामा प्रसाद इंटर कॉलेज में कट्टा लहराने पर 3 छात्र सस्पेंड। जानिए कैसे रील्स और 'रौब' जमाने की चाहत में किशोर भटकाव की राह पर जा रहे हैं। कंचनक्रांति की विशेष रिपोर्ट और अभिभावकों के लिए सलाह।
कंचनक्रांति ब्यूरो/ जमशेदपुर।
जमशेदपुर के परसूडीह खासमहल स्थित श्यामा प्रसाद इंटर कॉलेज से आई एक तस्वीर ने न सिर्फ कॉलेज प्रशासन, बल्कि पूरे समाज और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। 12वीं कक्षा (साइंस) के एक छात्र का क्लासरूम के भीतर देसी कट्टा और जिंदा कारतूस चमकाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस आत्मघाती कदम के बाद कॉलेज प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाते हुए वीडियो में संलिप्त तीन छात्रों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। लेकिन यह घटना सिर्फ अनुशासनहीनता की नहीं है, बल्कि यह किशोरों (टीनएजर्स) की मानसिकता में आ रहे एक खतरनाक और हिंसक बदलाव का अलार्म है।
अहंकार और 'रौब' की भूख ने थमा दिए हथियार
कॉलेज के प्रिंसिपल एससी महतो की मौजूदगी में जब आरोपी छात्र और उसके अभिभावकों से पूछताछ हुई, तो पहले तो छात्र मुकर गया। लेकिन वीडियो सामने आते ही उसकी हकीकत खुल गई। पूछताछ में जो वजह सामने आई, वह बेहद डराने वाली है। कुछ दिन पहले कॉलेज के बाहर दूसरे गुट के लड़कों से उसकी कहासुनी हुई थी। बस, इसी बात का बदला लेने, दूसरे छात्रों पर अपना खौफ पैदा करने और खुद को 'डॉन' साबित करने के चक्कर में वह कॉलेज के बस्ते में किताबों की जगह 315 बोर का कट्टा और जिंदा गोली ले आया। वीडियो में उसके दो दोस्त भी इस रील-संस्कृति और रौब का हिस्सा बनते दिखे।
फिलहाल, छात्रों के करियर को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस को मामला नहीं सौंपा है और कमेटी अंतिम फैसला लेगी। लेकिन सवाल वही खड़ा है—आखिर हमारे बच्चे इस कदर हिंसक और आक्रामक क्यों हो रहे हैं?
कंचनक्रांति की विशेष सलाह: "रील और रियल लाइफ का अंतर समझाएं"
किशोरों में बढ़ते इस हिंसक व्यवहार, एंगर इश्यूज (गुस्से) और हथियारों के प्रति आकर्षण पर कंचनक्रांति समाज, स्कूल और अभिभावकों से कुछ बेहद जरूरी बातें साझा कर रहा है:
· अभिभावक (Parents) दोस्त बनें, जासूस नहीं: 15 से 19 साल की उम्र ऐसी होती है जहां बच्चे खुद को बड़ा साबित करना चाहते हैं। माता-पिता बच्चों के बैग की नियमित जांच करें, लेकिन उससे भी ज्यादा उनके दोस्तों और उनके बदले हुए व्यवहार (अचानक चुप रहना या ज्यादा गुस्सा करना) पर नजर रखें।
· रील बनाम रियल लाइफ का भ्रम दूर करें: आज के सोशल मीडिया, गैंगस्टर आधारित वेब सीरीज और रील्स ने 'हथियार चमकाने' और 'गैंगवार' को एक 'कूल' ट्रेंड बना दिया है। बच्चों को समझाना होगा कि असल जिंदगी में इसका अंजाम सिर्फ जेल या तबाही है।
· काउंसलिंग की बेहद जरूरत: हर हाई स्कूल और कॉलेज में एक पेशेवर काउंसलर होना अनिवार्य होना चाहिए। बच्चे आपसी विवाद सुलझाने के लिए हिंसा का सहारा ले रहे हैं, इसका मतलब है कि वे मानसिक तनाव और हीन भावना (Inferiority Complex) से जूझ रहे हैं। उन्हें सही गाइडेंस की जरूरत है।
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