झारखंड हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने सड़क हादसे से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुआवजा बढ़ाकर ₹2.75 लाख कर दिया है। अदालत ने 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान का निर्देश दिया। पढ़ें पूरी खबर।


रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने एक दुखद सड़क हादसे से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पीड़ित परिवार को राहत दी है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अदालत ने सोमवार को याचिकाकर्ता मेघराज चौधरी की अपील पर सुनवाई करते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 2.75 लाख रुपये कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया है कि बढ़ी हुई राशि पर दावा आवेदन दाखिल करने की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान होने तक 6 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज भी दिया जाए।


यह घटना 10 जनवरी 2001 की है, जब एक सड़क दुर्घटना में मेघराज चौधरी के पिता बलदेव चौधरी की मौत हो गई थी। इस मामले में गिरिडीह स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने वर्ष 2008 में सुनवाई करते हुए 1.48 लाख रुपये का मुआवजा तय किया था। याचिकाकर्ता मेघराज चौधरी ने इस राशि को अपर्याप्त और कम बताते हुए न्याय के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।


हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान मृतक की मासिक आय और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन किया:

मृतक की मासिक आय ₹1,500 मानी गई और इसमें भविष्य की संभावनाओं (Future Prospects) के मद में 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि जोड़ी गई।

आश्रित के लिए ₹1.65 लाख रुपये तय किए गए।

परिजनों के लिए ₹80,000 की राशि निर्धारित की गई।

अंतिम संस्कार के खर्च के रूप में ₹15,000 तय किए गए।

संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए ₹15,000 जोड़े गए।

इन सभी मदों को जोड़कर अदालत ने कुल मुआवजा 2.75 लाख रुपये तय किया और बीमा कंपनी/संबंधित पक्ष को ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया।