कॉजपा के 'चलो संसद' मार्च में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने संसद में अपनी पीड़ा पर चर्चा की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि अब तक सिर्फ पुलिस प्रताड़ना के आरोपों पर ही बात हुई है।
नयी दिल्ली | कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिजनों का दर्द अब सामने आया है। शुक्रवार को घायल चार पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मांग की कि संसद में केवल एकतरफा आरोप-प्रत्यारोप के बजाय उनके परिजनों की पीड़ा और उन पर हुए हमलों पर भी विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।
'चर्चा सिर्फ एकतरफा क्यों?'
परिजनों का कहना है कि प्रदर्शन के बाद से ही पूरा घटनाक्रम और राजनीतिक बयानबाजी मुख्य रूप से 'पुलिस प्रताड़ना' के आरोपों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। परिजनों ने दुख जताते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात जवानों पर हुए हिंसक हमलों और उनके दर्द को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है।
"संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत है। अगर वहां इस घटना पर बात हो रही है, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए घायल हुए पुलिसकर्मियों के पक्ष को भी जगह मिलनी चाहिए।"
घायल पुलिसकर्मियों के परिजन
क्या था मामला?
गौरतलब है कि हाल ही में कॉजपा द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच भारी झड़प हो गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान दिल्ली पुलिस के कई जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे।