पटना के एसबीआई गांधी मैदान परिसर में लोक पंच ने ‘लालच का जाल’ नाटक का मंचन किया। मनीष महिवाल के लेखन एवं निर्देशन में प्रस्तुति ने साइबर ठगी, मनी म्यूल अकाउंट और डिजिटल ब्लैकमेलिंग से बचने का संदेश दिया।

कंचन क्रांति न्यूज, पटना।

डिजिटल युग में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और ऑनलाइन ठगी के नए-नए तरीकों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से सोमवार को पटना स्थित एसबीआई, गांधी मैदान परिसर में नाटक ‘लालच का जाल’ का मंचन किया गया। लोक पंच की इस प्रस्तुति में साइबर ठगी, बैंक खातों के दुरुपयोग और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसी गंभीर समस्याओं को नाटकीय घटनाओं के माध्यम से दर्शाया गया। नाटक का लेखन एवं निर्देशन मनीष महिवाल ने किया। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सहयोग से आयोजित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को ऑनलाइन दुनिया में सतर्क रहने और साइबर अपराध का शिकार होने पर समय रहते सहायता लेने का संदेश दिया।

नौकरी के लालच में साइबर अपराधियों के जाल में फंसा अमित

नाटक की पहली कहानी अमित नाम के कॉलेज छात्र के इर्द-गिर्द घूमती है। पटना का रहने वाला अमित अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पार्ट-टाइम नौकरी की तलाश करता है। घर बैठे आसानी से हजारों रुपये कमाने के लालच में वह साइबर अपराधियों के संपर्क में आ जाता है।

अपराधी उसके बैंक खाते के माध्यम से ठगी की रकम दूसरे खातों में पहुंचाने के बदले कमीशन देने का प्रलोभन देते हैं। अनजाने में अमित का बैंक खाता साइबर ठगी की रकम के लेन-देन का माध्यम बन जाता है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘मनी म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।

बाद में साइबर सेल द्वारा उसका खाता फ्रीज किए जाने पर अमित को पता चलता है कि उसका बैंक खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उसे अपनी गलती की गंभीरता और संभावित कानूनी परिणामों का एहसास होता है। इस प्रसंग के माध्यम से नाटक ने युवाओं को आसान कमाई के लालच में अनजान लोगों के साथ बैंक खाते की जानकारी साझा करने या खाते का इस्तेमाल कराने से बचने की सीख दी।

फर्जी वीडियो कॉल से डिजिटल ब्लैकमेलिंग का शिकार हुआ राहुल

नाटक की दूसरी कहानी राहुल की है, जो फर्जी वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल ब्लैकमेलिंग का शिकार बन जाता है। सामाजिक बदनामी के डर से वह साइबर अपराधियों को पैसे देने लगता है। लेकिन एक बार रकम मिलने के बाद अपराधियों की मांग लगातार बढ़ती जाती है।

लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक दबाव के कारण राहुल गहरे तनाव में पहुंच जाता है। हालात बिगड़ने पर उसके मन में आत्मघाती विचार आने लगते हैं। हालांकि, अंततः वह हिम्मत जुटाकर अपने दोस्त की मदद लेता है और साइबर सेल तक पहुंचता है। वहां से उसे सहायता मिलने और न्याय की उम्मीद दिखाई देती है।

इस कहानी के जरिए नाटक ने संदेश दिया कि डिजिटल ब्लैकमेलिंग के मामलों में डर और बदनामी की आशंका के कारण चुप रहना समस्या को और गंभीर बना सकता है। ऐसे मामलों में भरोसेमंद व्यक्ति की मदद लेकर पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करना जरूरी है।

जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का रास्ता

‘लालच का जाल’ केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से साइबर अपराध के अलग-अलग तरीकों और उनके सामाजिक एवं मानसिक प्रभावों को भी सामने लाया गया। नाटक ने बताया कि थोड़ी-सी लापरवाही, आसान कमाई का लालच या सामाजिक बदनामी का भय किसी व्यक्ति को गंभीर संकट में डाल सकता है।

प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य डिजिटल ब्लैकमेलिंग, बैंक खातों के दुरुपयोग और ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। खासकर युवाओं को अनजान लोगों के झांसे में नहीं आने, बैंक खाते का दुरुपयोग नहीं होने देने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया गया।

नाटक ने यह भी रेखांकित किया कि साइबर अपराध का शिकार होने पर घबराने या अपराधियों की मांग के आगे झुकने के बजाय समय पर सहायता लेना महत्वपूर्ण है। जागरूकता, साहस और उचित कानूनी मदद के जरिए ऐसे मामलों का सामना किया जा सकता है।

कलाकारों ने किया प्रभावशाली अभिनय

नाटक में मृत्युंजय प्रसाद, रजनीश पांडे, अभिषेक राज, रोहित कुमार, सोनल कुमारी, प्रिंस, गौतम और मनीष महिवाल ने अभिनय किया। लेखन एवं निर्देशन की जिम्मेदारी मनीष महिवाल ने संभाली। भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से लोक पंच, पटना की इस प्रस्तुति के माध्यम से साइबर अपराध के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया।

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