झरिया के कामिनी कल्याण बस्ती में जमीन धसने से एक दर्जन से अधिक घरों में दरारें आ गई हैं। रविवार को जांच के लिए पहुंचे बीसीसीएल अधिकारियों को स्थानीय लोगों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा।
झरिया। झरिया-धनबाद मुख्य मार्ग और बंद पड़े आरएसपी (RSP) कॉलेज के समीप स्थित कामिनी कल्याण बस्ती में शनिवार को तेज आवाज के साथ जमीन धंसने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भू-धंसान के कारण बस्ती के एक दर्जन से अधिक घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। इस घटना के बाद से पूरी बस्ती में दहशत और डर का माहौल व्याप्त है।
घटना की सूचना मिलने के बाद रविवार को जब भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के अधिकारी स्थिति का जायजा लेने कामिनी कल्याण बस्ती पहुंचे, तो स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेर लिया और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का आरोप है कि बीसीसीएल प्रबंधन उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है और हर बार हादसे के बाद केवल औपचारिकता निभाई जाती है।
प्रबंधन के अनुसार, इस बस्ती को लगभग एक दशक (10 साल) पहले ही खतरनाक और असुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। प्रभावित घर: बस्ती में लगभग 50 से अधिक परिवार निवास करते हैं, जिनमें से एक दर्जन से अधिक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
इस घटना में किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन संपत्ति को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
इस इलाके में पहले भी कई बार गोफ (जमीन में गड्ढा) बनने और घरों में दरारें आने की घटनाएं घट चुकी हैं।
भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह बस्ती पहले बीसीसीएल की बंद पड़ी भगतडीह कोलियरी के अंतर्गत आती थी। वर्तमान में यह क्षेत्र बस्ताकोला एरिया की राजापुर परियोजना के अधीन संचालित होता है। क्षेत्र में भूमिगत आग और खदानों के कारण अक्सर जमीन धंसने का खतरा बना रहता है।
स्थानीय निवासियों ने बीसीसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाए, ताकि किसी बड़े जान-माल के नुकसान से बचा जा सके।
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