ग्रेटर नोएडा वेस्ट की निराला ग्रीनआर्क सोसायटी में दूषित गंगाजल पीने से 100 से अधिक लोग बीमार हो गए हैं। पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि के बाद 11 टावरों के 1640 परिवारों में दहशत है। जानिए पूरा मामला और निवासियों के गंभीर आरोप।


ग्रेटर नोएडा वेस्ट। ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) स्थित निराला ग्रीनआर्क सोसायटी से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। सोसायटी में आपूर्ति किए जा रहे गंगाजल के दूषित होने के कारण 100 से अधिक निवासी गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। पानी के सैंपल की प्राथमिक जांच में हानिकारक बैक्टीरिया (Bacteria) पाए जाने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद पूरी सोसायटी के 11 टावरों में रहने वाले करीब 1,640 परिवारों में डर और आक्रोश का माहौल है।


स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) की आपराधिक अनदेखी और लापरवाही के चलते यह स्थिति पैदा हुई है।


बीते एक सप्ताह में बिगड़े हालात: वॉट्सएप ग्रुपों पर मची चीख-पुकार

निवासियों के अनुसार, पिछले 7 से 10 दिनों के भीतर सोसायटी के आधिकारिक वॉट्सएप ग्रुप्स पर एक के बाद एक बीमारी के मैसेज आने शुरू हुए।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उल्टी, दस्त (डायरिया), पेट में तेज दर्द, मरोड़ और तेज बुखार की शिकायतें देखी गईं।

कई निवासियों की तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि उन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा, जबकि कई लोग अपने घरों पर ही ड्रिप और दवाओं के सहारे इलाज करा रहे हैं।


सोसायटी के लोगों का कहना है कि यह संकट रातों-रात खड़ा नहीं हुआ है। पिछले दो महीनों से नलों में आने वाले गंगाजल की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही थीं।


"पानी से अजीब सी बदबू आ रही थी और इसका रंग भी साफ नहीं था। हमने कई बार AOA और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के जल विभाग को लिखित और मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन हर बार हमारी बातों को अनदेखा कर दिया गया। अगर समय रहते वाटर टैंकों की सफाई और वाटर क्वालिटी टेस्टिंग कराई जाती, तो आज सैकड़ों लोग बीमार न पड़ते।"


— एक पीड़ित निवासी, निराला ग्रीनआर्क



जब प्रशासनिक स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो निवासियों ने अपने स्तर पर पानी के सैंपल एकत्र करवाकर लैब में जांच के लिए भेजे।

रिपोर्ट में पानी के अंदर मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाने की बात सामने आई है, जो सीधे तौर पर सीवरेज या गंदगी का मिश्रण पानी की मुख्य सप्लाई में होने की ओर इशारा करता है।

इस खुलासे के बाद 11 टावरों के हजारों लोगों ने सरकारी और सप्लाई वाले पानी का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया है। लोग अब जार वाले बोतलबंद पानी पर निर्भर होने को मजबूर हैं।


इस घटनाक्रम के बाद निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उन्होंने AOA (Appartment Owners Association) की कार्यशैली और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही पर सख्त सवाल खड़े किए हैं:

ओवरहेड और अंडरग्राउंड टैंकों की सफाई: क्या सोसायटी के पानी के टैंकों की समय पर वैज्ञानिक तरीके से सफाई की गई थी?

क्या गंगाजल की मुख्य पाइपलाइन में कहीं सीवर का पानी मिक्स हो रहा है, जिसकी जांच अथॉरिटी ने नहीं की?

सैकड़ों लोगों की सेहत को खतरे में डालने के लिए जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?


निवासियों की मुख्य मांगें

सोसायटी के लोगों ने प्रशासन से तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:

पूरी सोसायटी के वॉटर टैंकों की तुरंत सुपर-क्लोरीनेशन और सफाई की जाए।

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की स्वास्थ्य एवं जल विभाग की टीम तुरंत मौके पर आकर आधिकारिक जांच करे।

पीड़ित परिवारों को चिकित्सा सहायता और मुफ्त मेडिकल कैंप की सुविधा दी जाए।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और AOA प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई हो।