देवघर के 500 साल पुराने ऐतिहासिक पथरोल महाकाली मंदिर में नवरात्रि नवमी पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़। बंद शौचालय और गंदगी के कारण महिलाएं खुले में कपड़े बदलने को विवश। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट।
चंदन कुमार ठाकुर, देवघर।
देवघर जिले के पथरोल थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित लगभग 500 वर्ष पुराने ऐतिहासिक महाकाली मंदिर में शारदीय नवरात्रि की नवमी के पावन अवसर पर आस्था का महासैलाब उमड़ पड़ा। 10 महाविद्याओं की प्रथम देवी मां काली के अलौकिक दर्शन और पूजन के लिए तड़के से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार माता के दरबार में बकरा, भैंस और भेड़ की बलि अर्पित की गई, वहीं कई श्रद्धालुओं ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार करवा कर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया।
क्या है मंदिर का 500 साल पुराना इतिहास?
स्थानीय मान्यताओं और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, पथरोल का महाकाली मंदिर करीब पांच सदी पुराना है। पथरोल के राजा श्री दिग्विजय सिंह द्वारा कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट से माता के स्वरूप की प्रतिमा को पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ लाकर यहाँ स्थापित कराया गया था। मान्यता है कि दुर्गा पूजा और दिवाली के अवसर पर महिलाएं यहाँ विशेष दीप प्रज्वलित कर मनोकामना मांगती हैं। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, सच्चे मन से मां के दरबार में हाजिरी लगाने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है।
आस्था भारी, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का भारी टोटा
एक तरफ जहाँ इस प्राचीन सिद्धपीठ में श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक उपेक्षा और अव्यवस्थाओं ने भक्तों—विशेषकर महिला श्रद्धालुओं की फजीहत करा दी।
मंदिर परिसर में दूर-दूर से आईं महिलाओं के लिए स्नान करने या सुरक्षित तरीके से वस्त्र बदलने की कोई व्यवस्था नहीं है। परिसर में निर्मित शौचालय पर वर्षों से ताला जड़ा हुआ है, जिससे वह पूरी तरह अनुपयोगी बना हुआ है। मजबूरी में महिला श्रद्धालुओं को खुले में ही कपड़े बदलने पड़ रहे हैं, जो उनके लिए भारी असहजता और शर्मिंदगी का कारण बन रहा है। वहीं, श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए बने यात्री शेड में इतनी गंदगी पसरी है कि वहाँ बैठना तो दूर, दो मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल साबित हो रहा है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की खामोशी पर सवाल
क्षेत्रीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि यह ऐतिहासिक धार्मिक स्थल झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री हफीजुल हसन के विधानसभा क्षेत्र (मधुपूर) का हिस्सा है। साथ ही यह क्षेत्र गोड्डा के ओजस्वी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के संसदीय क्षेत्र में आता है। इतने बड़े जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में होने और स्वयं पर्यटन विभाग के मंत्री के गृह क्षेत्र का हिस्सा होने के बावजूद इस 500 साल पुरानी धरोहर की बदहाली और श्रद्धालुओं की उपेक्षा स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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