पेपर लीक पर GenZ के विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया। प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। पढ़ें पूरी खबर।
नई दिल्ली। देश के लाखों युवाओं का आक्रोश, सड़कों पर उतरा GenZ का सैलाब और पेपर लीक से टूटे सपनों का दर्द आखिरकार रंग लाया। व्यापक विरोध और राजनीतिक हलचलों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।
प्रह्लाद जोशी पहले से ही केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब देश के भविष्य को संवारने और शिक्षा व्यवस्था पर छात्रों का भरोसा वापस कायम करने की बड़ी चुनौती उनके कंधों पर होगी।
जब छात्र शक्ति के आगे हिली सरकार
पेपर लीक के खिलाफ उभरे इस पूरे आंदोलन में सरकार और सत्ताधारी दल को युवाओं (GenZ) के साथ संवादहीनता का गहराई से अहसास हुआ।
'कॉकरोच जनता पार्टी' से जनआंदोलन: इंस्टाग्राम पर एक व्यंग्य (मीम) पेज से शुरू हुई मुहीम महज दो महीने के भीतर देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक बन जाएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
20 जुलाई का ऐतिहासिक संसद मार्च: भीषण उमस और चिलचिलाती धूप के बावजूद भारी संख्या में छात्र जंतर-मंतर पर डटे रहे और संसद मार्च निकाला। छात्रों के इस अटूट जज्बे ने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया।
प्रधानमंत्री का संवाद और दोस्ती का हाथ
छात्रों के बढ़ते असंतोष को देखते हुए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर रील जारी कर युवाओं से सीधा संवाद स्थापित किया।
"प्रधानमंत्री ने युवाओं को 'GenZ फ्रेंड्स' कहकर संबोधित किया और दोस्ती का हाथ बढ़ाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानून बनाए जाएंगे, दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलेगी और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी व चुस्त-दुरुस्त किया जाएगा।"
इसी पूरे घटनाक्रम के तुरंत बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सामने आया।
जानिए कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने गए प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के बेहद अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं:
2019-2024: पहली बार 30 मई 2019 को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली और संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री तथा खान मंत्री का प्रभार संभाला।
जून 2024: आम चुनाव के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।
अब (शिक्षा मंत्रालय): धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्हें शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने का यह महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
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