जमशेदपुर के बिरसानगर में PMAY (शहरी) आवास मिलने के बाद विधायक सरयू राय आवंटियों के गृह प्रवेश में पहुंचे। संघर्ष के साथी को अपने आशियाने में देख लोग भावुक हो गए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।


कंचन क्रांति ब्यूरो, जमशेदपुर:

रविवार को जमशेदपुर के बिरसानगर में कुछ घरों के सिर्फ दरवाजे ही नहीं खुले, बल्कि पुरानी यादों और भावनाओं के द्वार भी खुल गए। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मिले अपने आशियाने में जब लोगों ने जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय को सामने खड़ा देखा, तो किसी के चेहरे पर खुशी खिल उठी, तो किसी का गला भावुकता से भर आया।

लंबे संघर्ष के बाद मिले घर में उस शख्स का आना आवंटियों के लिए बेहद खास पल था, जिसने फ्लैटों के आवंटन के लिए उनके साथ सड़क से लेकर शासन तक जमीनी लड़ाई लड़ी थी।

निजी आमंत्रण से शुरू हुआ मुलाकातों का सिलसिला

दरअसल, सरयू राय रविवार को स्थानीय निवासी शंकर तांडी के विशेष आमंत्रण पर उनके गृह प्रवेश समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन उनके वहां पहुंचने की खबर जैसे ही अन्य आवंटियों को लगी, पूरे इलाके का माहौल बदल गया। लोग उनसे मिलने के लिए जुटने लगे और आग्रह करने लगे—“विधायक जी, हमारे घर भी चलिए!”

सरयू राय ने भी किसी को निराश नहीं किया। उन्होंने लोगों का प्यार और आग्रह सहर्ष स्वीकार किया और एक के बाद एक कई फ्लैटों का दौरा किया। उन्होंने वहां की व्यवस्थाएं देखीं, परिजनों से मुलाकात की और उनका हाल-चाल जाना।

एक पुरानी कसक हुई कम

इन परिवारों की खुशी के पीछे एक पुरानी कसक भी छिपी थी। जब आवंटियों को उनके फ्लैटों की चाबियां सौंपी जा रही थीं, तब सरयू राय रांची में थे और समारोह से केवल ऑनलाइन जुड़े थे। आवंटियों की दिली इच्छा थी कि जिस जन प्रतिनिधि ने उनके आवास के लिए संघर्ष किया, उसी के हाथों उन्हें चाबी मिले। रविवार को जब सरयू राय खुद उनके घर की चौखट पर पहुंचे, तो लोगों की वह पुरानी कसक काफी हद तक दूर हो गई।

एक-एक कर कई परिवारों से की मुलाकात

अपने दौरे के दौरान विधायक सरयू राय पी. राजा राव (फ्लैट नं. 104), अंतरा सिन्हा (फ्लैट नं. 212), विनय कुमार (फ्लैट नं. 208), संगीता (फ्लैट नं. 102), पिंकी देवी (फ्लैट नं. 112), देबू दास (फ्लैट नं. 105), रूबी देवी (फ्लैट नं. 209) और सुजीत के. बोस (फ्लैट नं. 003) के आवास पर पहुंचे। विधायक को अपने बीच पाकर लोग बेहद उत्साहित दिखे। बातचीत के दौरान संघर्ष के दिनों की यादें ताजा हुईं तो कई लोगों की आंखें भर आईं।

ईंट-पत्थर का मकान नहीं, संघर्ष की कहानी है बिरसानगर आवास

बिरसानगर में PMAY (शहरी) के तहत बने इन फ्लैटों की कहानी सिर्फ निर्माण और आवंटन तक सीमित नहीं है। फ्लैटों के समय पर आवंटन के लिए सरयू राय ने जेएनएसी (JNAC) से लेकर मुख्यमंत्री तक का दरवाजा खटखटाया था। आवंटन की तारीखें कई बार टलीं, लेकिन उनका प्रयास जारी रहा और अंततः लोगों को उनके सपनों का घर मिला।

रविवार को जब सरयू राय उन्हीं घरों की चौखट के भीतर खड़े थे, तो यह महज एक जनप्रतिनिधि का दौरा नहीं था—यह अपने आशियाने में संघर्ष के एक पुराने साथी की दस्तक थी।

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