सुप्रीम कोर्ट ने 6 सांसदों के शिंदे गुट वाली शिवसेना में विलय के खिलाफ दायर उद्धव ठाकरे गुट (Shiv Sena UBT) की याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए स्थगित कर दी है। कोर्ट ने नोटिस तामील न होने के कारण यह फैसला सुनाया।


नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (UBT) द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है, जिसमें उसके 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई है।


जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और अन्य संबंधित पक्षों को अभी तक कोर्ट द्वारा जारी नोटिस की प्रति (copy) तामील (serve) नहीं कराई गई है। इसी प्रशासनिक कारण को ध्यान में रखते हुए पीठ ने सुनवाई को दो हफ्ते आगे बढ़ाने का फैसला लिया।


सुनवाई के दौरान शिवसेना (UBT) नेता अरविंद गणपत सावंत की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष तर्क रखा कि अदालत को इस मामले में अंतरिम राहत पर जल्द विचार करना चाहिए। सावंत ने अपनी याचिका में लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें UBT गुट के 6 सांसदों के शिंदे गुट की शिवसेना में विलय को वैध माना गया था।


शिवसेना में हुए विभाजन के बाद से ही दोनों गुटों (उद्धव ठाकरे नीत UBT और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना) के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और जनप्रतिनिधियों की सदस्यता को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है। लोकसभा में UBT गुट के 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने और अध्यक्ष द्वारा इसे दी गई मान्यता को UBT गुट ने असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें अंतरिम राहत पर भी विचार किया जा सकता है।