केवल लोन न चुका पाने पर धोखाधड़ी का केस नहीं दर्ज हो सकता। झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर के 9.30 लाख रुपये के कर्ज से जुड़े आपराधिक मामले और एसडीजेएम कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।


  • अदालत की टिप्पणी: धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने के लिए

लेन-देन की शुरुआत से ही बेईमान नीयत होना जरूरी


 कंचन क्रांति ब्यूरो, देवघर।

झारखंड हाईकोर्ट ने कर्ज की रकम बकाया रहने से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल लोन की राशि न चुका पाने के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मामला नहीं दर्ज किया जा सकता। अदालत ने कहा कि धोखाधड़ी का अपराध तभी माना जाएगा, जब यह साबित हो कि लेन-देन की शुरुआत से ही संबंधित व्यक्ति की नीयत धोखा देने या बेईमानी करने की थी।

 

जस्टिस अनिल चौधरी की एकल पीठ ने इस कानूनी सिद्धांत के आधार पर बिमलेंदु शेखर झा के खिलाफ देवघर में दर्ज पूरी आपराधिक कार्यवाही और एसडीजेएम देवघर द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया।

 

क्या है पूरा मामला

बिमलेंदु शेखर झा ने बैंक ऑफ इंडिया की देवघर शाखा में पदस्थापना के दौरान 'देवघर जिला (शहरी क्षेत्र) राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मचारी बचत एवं साख स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड' से 9.30 लाख रुपये का कर्ज लिया था। रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने 7.50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। हालांकि, समिति के सचिव ने दावा किया था कि ब्याज सहित 4.85 लाख रुपये बकाया हैं और इसी आधार पर देवघर अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद इसे विशुद्ध रूप से दीवानी (सिविल) विवाद मानते हुए आपराधिक केस को खारिज कर दिया।

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