बाबा बैद्यनाथ मंदिर को पारदर्शी और मॉडल तीर्थस्थल बनाने के लिए सीएम को सौंपा गया 18 सूत्रीय सुझाव पत्र। फ्री लंगर, आय-व्यय का सार्वजनिक हिसाब और नए नियमों का प्रस्ताव।
कंचन क्रांति ब्यूरो, देवघर।
विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर को देश का सबसे पारदर्शी, आधुनिक और श्रद्धालु-हितैषी धार्मिक स्थल बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। मंदिर प्रबंधन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चन्द्र शेखर खवाड़े ने झारखंड के मुख्यमंत्री सह बाबा बैद्यनाथ धाम-बासुकिनाथ तीर्थ क्षेत्र विकास प्राधिकार के अध्यक्ष को एक महत्वपूर्ण पत्र सौंपा है। इस पत्र में 18 सूत्रीय सुझावों के जरिए मंदिर प्रशासन, वित्तीय पारदर्शिता, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई क्रांतिकारी बदलावों का रोडमैप पेश किया गया है।
1.निःशुल्क लंगर का प्रस्ताव
पत्र में सबसे प्रमुख सुझाव यह दिया गया है कि पटना के प्रसिद्ध महावीर हनुमान मंदिर की तर्ज पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं से प्राप्त होने वाली दान-राशि का उपयोग कर प्रतिदिन निःशुल्क प्रसाद वितरण (लंगर) की व्यवस्था शुरू की जाए। इससे दूर-दराज से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सीधा लाभ मिलेगा।
2. वित्तीय पारदर्शिता: हर महीने सार्वजनिक होगी मंदिर की कमाई और खर्च
श्रद्धालुओं का विश्वास सुदृढ़ करने के लिए मांग की गई है कि:
· मंदिर की मासिक आय, व्यय और शुद्ध बचत का पूरा लेखा-जोखा हर महीने आधिकारिक वेबसाइट और सूचना पट्ट पर प्रदर्शित किया जाए।
· चढ़ावे की गिनती के समय मजिस्ट्रेट की उपस्थिति अनिवार्य हो और पूरी प्रक्रिया की CCTV रिकॉर्डिंग कराई जाए।
· अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति का समय-समय पर सत्यापन हो और स्वतंत्र एजेंसियों से ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
3. 'वीआईपी' प्रोटोकॉल और शीघ्रदर्शनम व्यवस्था पर कसेगा शिकंजा
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और सरकार को होने वाली राजस्व हानि रोकने के लिए प्रोटोकॉल व्यवस्था को स्पष्ट और सीमित करने का सुझाव दिया गया है। पत्र के अनुसार, वीआईपी और प्रोटोकॉल के तहत दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी शीघ्रदर्शनम कूपन अनिवार्य किया जाए ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न फैले।
4. पंडा-पुजारियों और कर्मचारियों के लिए अलग 'ड्रेस कोड'
गर्भगृह (बाबा मंदिर और मां पार्वती मंदिर) में तैनात सुरक्षाकर्मियों व कर्मचारियों के लिए अनिवार्य 'ड्रेस कोड' की मांग की गई है, ताकि श्रद्धालु पंडा-पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों की पहचान आसानी से कर सकें।
5. पर्यावरण और धार्मिक आस्था का संरक्षण
· जल और पुष्प प्रबंधन: बाबा पर अर्पित पवित्र जल और फूलों को साधारण नालों में प्रवाहित न कर, उनका वैज्ञानिक व गरिमापूर्ण तरीके से संरक्षण या विसर्जन किया जाए।
· प्लास्टिक पर बैन: कांवरियों को मिलने वाले पानी के प्लास्टिक पाउच को बंद कर पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने की बात कही गई है।
· क्यू कॉम्प्लेक्स का उपयोग: संस्कार मंडप को मुंडन, उपनयन व हवन के लिए खाली रखकर श्रद्धालुओं को सीधे क्यू कॉम्प्लेक्स व ओवरब्रिज के माध्यम से गर्भगृह भेजने का सुझाव दिया गया है।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष की अपील:
चन्द्र शेखर खवाड़े का कहना है कि इन सुझावों पर चरणबद्ध तरीके से अमल करने पर बाबा बैद्यनाथ धाम न केवल झारखंड के लिए गौरव बनेगा, बल्कि पूरे देश के मंदिर प्रबंधन प्रणाली के लिए एक आदर्श मिसाल कायम करेगा।
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