बिहार के 220 संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी नियमित वेतन-पेंशन और 9 सूत्री मांगों को लेकर 2 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।

 

पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त करने वाले प्रस्तावित 'विश्वविद्यालय अधिनियम 2026' को रद्द करने, नियमित वेतन-पेंशन के भुगतान और 9 सूत्री मांगों को लेकर बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राज्य भर के 220 संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और कर्मचारी आगामी 2 सितंबर से पुनः चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।



दो सितंबर को विवि मुख्यालय और 9 सितंबर से पटना में अनिश्चितकालीन धरना

फैक्टनेब के अध्यक्ष डॉ. शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा, महासचिव प्रो. राजीव रंजन, मीडिया प्रभारी प्रो. अरुण गौतम, सचिव प्रो. श्रवण कुमार व डॉ. रवींद्र कुमार तथा पीपीयू महासचिव डॉ. रविकांत सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण में 2 सितंबर को राज्य के सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके उपरांत, 9 सितंबर से राजधानी पटना में मुख्यमंत्री आवास के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन आयोजित होगा।

 

क्या हैं प्रमुख 9 सूत्री मांगें?


विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 को रद्द करना: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करने के प्रस्ताव को वापस लेना।

नियमित वेतन-पेंशन भुगतान: पटना उच्च न्यायालय के न्यायादेश और बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में समय पर वेतन और पेंशन देना।

बकाया अनुदान का एकमुश्त भुगतान: शैक्षणिक सत्र 2015-18 से 2022-25 तक (कुल आठ वर्षों) का परीक्षा परिणाम आधारित बकाया अनुदान राशि (इंटर खंड सहित) बढ़े हुए महंगाई दर के साथ अधिसीमा समाप्त कर एकमुश्त बैंक खातों में भेजना।

ससमय चुनाव व मनोनयन: शासी निकाय में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि का मनोनयन, शिक्षक प्रतिनिधि की चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरा करना और सीनेट सदस्यों का पारदर्शी चुनाव कराना।

समान पारिश्रमिक: उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के पारिश्रमिक और भत्तों में एकरूपता लाना।

 

सरकार अपनी हठधर्मिता त्यागे: फैक्टनेब

फैक्टनेब के नेताओं ने कहा कि सूबे के 220 संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों में योग्य शिक्षक, विशाल भवन, सुसज्जित पुस्तकालय, प्रयोगशाला और खेल के मैदान उपलब्ध हैं। इन संस्थानों के पास 1500 एकड़ से अधिक भूमि है और लगभग 10 लाख छात्र-छात्राएं पठन-पाठन करते हैं।

 

नेताओं ने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि परीक्षा परिणाम आधारित अनुदान राशि के बजाय नियमित वेतन-पेंशन देने से राज्य के खजाने पर कोई विशेष आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा; इसके लिए केवल मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। उन्होंने बिहार सरकार से हठधर्मिता त्यागकर कर्मचारियों की चिरलंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान करने का आग्रह किया है।

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