देवघर में आयोजित CCDSICON-2026 के दूसरे दिन सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, डॉ. डीपी सिंह और डॉ. आरके झा ने स्वास्थ्य, डायबिटीज और हार्ट केयर पर महत्वपूर्ण विचार रखे। जानिए पूरी खबर।

कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।

देवघर के मैहर गार्डेन में आयोजित 'क्लिनिकल कार्डियक डायबिटीज सोसाइटी ऑफ इंडिया' (CCDSSI) के तीन दिवसीय 10वें राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन (CCDSICON-2026) का दूसरा दिन काफी खास रहा। इस राष्ट्रीय स्तर के भव्य आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए नामचीन चिकित्सक और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। सम्मेलन के दौरान मुख्य रूप से मधुमेह (Diabetes), उससे जुड़ी किडनी की जटिलताओं (Diabetic Kidney Disease), और हृदय रोगों पर विस्तार से मंथन किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर बोले सांसद डॉ. निशिकांत दुबे

सम्मेलन के मंच से गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधान और आधुनिक तकनीक से न केवल गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद मिल रही है, बल्कि आम जनता तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी सुलभ हो रही हैं। उन्होंने इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन को देवघर और पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया।

मधुमेह पीड़ितों में किडनी बीमारी की समय रहते पहचान जरूरी : डॉ. आरके झा

राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन में देवघर के डॉ. आरके झा ने सक्रिय रूप से भाग लिया और 'डायबिटिज एंड किडनी डिजिज' विषय पर अपने बहुमूल्य चिकित्सीय अनुभव साझा किए। आईजीएमएस पटना के डिपार्टमेंट ऑफ नेफ्रोलॉजी में वरिष्ठ रेजिडेंट के रूप में कार्य कर चुके डॉ. आरके झा ने कहा कि मधुमेह पीड़ित मरीजों में किडनी की बीमारी की समय रहते पहचान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने नियमित रूप से यूरिन एल्ब्यूमिन, किडनी फंक्शन और ब्लड प्रेशर की जांच कराने पर जोर दिया।

उन्होंने बताया कि आधुनिक उपचार और समय पर चिकित्सकीय निगरानी से किडनी की बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।

डॉ. झा ने स्पष्ट किया कि मधुमेह का उपचार केवल ब्लड शुगर नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मरीज की किडनी और हृदय संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए समग्र उपचार किया जाना आवश्यक है। सम्मेलन में उनकी सक्रिय भागीदारी को देवघर के लिए गौरवपूर्ण बताया गया।

 सीने के दर्द को बिल्कुल न करें नजरअंदाज : डॉ. डीपी सिंह

कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष डॉ. डीपी सिंह ने हृदय रोगों पर चेतावनी देते हुए कहा कि सीने में दर्द, जलन, बेचैनी या असहजता को मामूली समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि यह हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और मेटाबॉलिक समस्याएं हृदय रोग का खतरा काफी बढ़ा देती हैं, जिनका असर किडनी और मस्तिष्क पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों ने असंतुलित खान-पान और बढ़ते मोटापे को कई बीमारियों की जड़ बताया। भोजन में फल (जैसे अनार और पपीता), हरी सब्जियां और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करने तथा तेल का सेवन सीमित रखने की सलाह दी गई।

स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रतिदिन 6 से 7 घंटे की पर्याप्त नींद और करीब एक घंटे नियमित व्यायाम करने पर जोर दिया गया। साथ ही डॉक्टरों से आग्रह किया गया कि वे मरीजों की पर्ची पर दवाओं के साथ-साथ खान-पान और जीवनशैली से जुड़े सुझाव भी स्पष्ट रूप से लिखें।

इस भव्य सम्मेलन में आयोजन अध्यक्ष डॉ. डीपी सिंह, आयोजन सचिव डॉ. धन्वंतरी तिवारी सहित डॉ. हेमशंकर शर्मा, डॉ. अनिल कुमार विरमानी, डॉ. एएन राय, डॉ. मधुकर राय, डॉ. आरके लोहानी, डॉ. पीके सिंह, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. पीके सिन्हा, डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. मृत्युंजय कुमार, डॉ. आरके मोदी, डॉ. उमेश खां, डॉ. गगन गुंजन, और डॉ. सुधीर कुमार समेत देश भर से आए सैकड़ों डॉक्टर उपस्थित रहे।

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