मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई के चकाई में निर्माणाधीन एथेनॉल प्लांट का निरीक्षण किया। मार्च 2027 से शुरू होगा उत्पादन। जानिए 3400 करोड़ के निवेश और चकाई को स्टील हब बनाने की पूरी योजना।

ए. आलम, जमुई।  

बिहार को देश का एक प्रमुख औद्योगिक और कौशल (Skill) का हब बनाने की दिशा में सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार की दोपहर जमुई जिले के चकाई प्रखंड के उरबा पहुंचे और वहां निर्माणाधीन अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड एथेनॉल प्लांट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ई-रिक्शा पर सवार होकर पूरे प्लांट परिसर का भ्रमण किया, निर्माण कार्यों का बारीकी से जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने अवगत कराया कि इस प्लांट से मार्च 2027 तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा।

3,400 करोड़ रुपये का कुल निवेश और 10 हजार नए रोजगार

निरीक्षण के पश्चात प्लांट परिसर में ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जमुई जिलाधिकारी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि जिले में विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं—यथा अंकुर स्टील प्राइवेट लिमिटेड, अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड (इथिनॉल), सी०एल०एम० डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अंकुर ट्रेडविस्टा प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कुल 3,400 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया जा रहा है। इन सभी परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से क्षेत्र में 10 हजार से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

एशिया के सबसे बड़े ग्रेन-बेस्ड एथेनॉल प्लांट्स में से एक

चकाई में बन रहा अंकुर बायोकेम का यह प्लांट एशिया के सबसे बड़े ग्रेन-बेस्ड एथेनॉल प्लांट्स में शुमार है। इसे 105 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है, जिसकी उत्पादन क्षमता 1000 किलो लीटर प्रतिदिन (यानी लगभग 10 लाख लीटर एथेनॉल प्रतिदिन) होगी। इस संयंत्र में 20 मेगावाट की कैप्टिव पावर जनरेशन सुविधा भी होगी, जिससे यह ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा। इस प्लांट को प्रतिदिन लगभग 30,000 क्विंटल अनाज की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय किसानों को उनकी उपज का एक स्थायी और भरोसेमंद बाजार मिलेगा। साथ ही, यह संयंत्र 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' (ZLD) प्रणाली पर आधारित है, जो जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करेगा।

चकाई को स्टील और औद्योगिक हब बनाने की तैयारी, 9,000 एकड़ भूमि चिह्नित

मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चकाई को स्टील और औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की परिकल्पना को अब धरातल पर उतारा जा रहा है। इसके लिए चकाई में लगभग 9,000 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है, जिसमें करीब 5,000 एकड़ वन विभाग की तथा 4,000 एकड़ रैयती एवं अन्य श्रेणी की भूमि शामिल है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी 10 से 12 दिनों के भीतर चिह्नित भूमि की मैपिंग सुनिश्चित की जाए और 30 अक्टूबर तक पूरी भूमि का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर आगे की कार्ययोजना बनाई जाए ताकि वास्तविक वन क्षेत्र और रैयती भूमि की स्थिति स्पष्ट हो सके।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कई अन्य अहम निर्देश दिए:

पर्यटन विकास: ऐतिहासिक लछुआड़ मंदिर और गरही डैम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। लछुआर मंदिर में जनसुविधाओं के विस्तार और श्रद्धालुओं के ठहरने की उचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।

कानून व्यवस्था: पुलिसिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ करने, थानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और जिले में पूर्ण नशामुक्ति को लेकर लगातार जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

सड़क संपर्कता: भीम बांध से लक्ष्मीपुर तथा मुंगेर से गंगटा को जोड़ने वाली सड़कों को दुरुस्त रखने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए ताकि आवागमन सुगम बना रहे।

 इस अवसर पर उद्योग एवं खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह, परिवहन मंत्री श्री दामोदर रावत, पूर्व मंत्री सुमित कुमार सिंह, विधायक श्रीमती सावित्री देवी, विधान पार्षद विजय सिंह, पूर्व विधान पार्षद संजय सिंह, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक श्रीमती प्रीता वर्मा, मुंगेर प्रमंडलीय आयुक्त प्रेम सिंह मीणा, डीआइजी राकेश कुमार, डीएम नवीन, एसपी विश्वजीत दयाल, उद्योग विभाग के प्रधान सचिव विवेक कुमार सहित कई वरीय अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्लांट के पदाधिकारी (सी.एम.डी. महेन्द्र शर्मा व निदेशक विशाल शर्मा) मौजूद रहे।