RBI Cyber Fraud Compensation Policy : RBI का बड़ा ऐलान! ऑनलाइन या UPI फ्रॉड के शिकार लोगों को मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजा। जानें रिजर्व बैंक के इस नए नियम की शर्तें और शिकायत करने का सही तरीका।
कंचनक्रांति, नई दिल्ली:
देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट के साथ-साथ साइबर फ्रॉड के मामलों में भी भारी उछाल आया है। हर दिन हजारों लोग फर्जी लिंक, नकली कॉल, ओटीपी फ्रॉड और यूपीआई स्कैन का शिकार होकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। इसी डिजिटल ठगी को रोकने और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आरबीआई के नए नियम के तहत अब ऑनलाइन फ्रॉड के पीड़ितों को ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकता है।
आरबीआई का मानना है कि इस कदम से डिजिटल भुगतान सिस्टम पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा। यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए मददगार साबित होगी जो छोटी रकम के साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं और अक्सर अपना पैसा वापस नहीं पा पाते हैं।
1 जनवरी 2027 से लागू होगी व्यवस्था
आरबीआई ने इस नई व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया है। हालांकि, पहले इसे जुलाई 2026 से लागू करने की योजना थी, लेकिन अब इसे 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि यह नियम 1 जनवरी 2027 के बाद होने वाले डिजिटल फ्रॉड के मामलों पर पूरी तरह से लागू होगा।
किसे और कितना मिलेगा मुआवजा?
आरबीआई के अंतिम ढांचे (Framework) के अनुसार, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट या क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के शिकार ग्राहकों को उनके कुल नुकसान का 85% तक (अधिकतम ₹25,000) मुआवजा दिया जा सकता है।
· ₹20,000 का फ्रॉड होने पर: नियम के मुताबिक पीड़ित को एक बड़ी राशि (85% तक) वापस मिल सकती है।
· ₹50,000 या उससे अधिक का फ्रॉड होने पर: अधिकतम मुआवजे की सीमा ₹25,000 तय की गई है।
· गलती होने पर भी राहत: खास बात यह है कि कुछ मामलों में अगर ग्राहक से छोटी-मोटी गलती भी हुई है, तब भी राहत मिलने की संभावना रखी गई है, बशर्ते उन्होंने समय पर इसकी शिकायत की हो।
मुआवजा पाने के लिए सबसे जरूरी शर्त: 5 दिन का नियम
यह मुआवजा सभी मामलों में अपने आप नहीं मिलेगा। इसके लिए आरबीआई ने कुछ सख्त शर्तें रखी हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है 'शिकायत दर्ज कराना'।
· फ्रॉड का शिकार होने के बाद ग्राहक को 5 दिनों के भीतर अपने बैंक या संबंधित वित्तीय संस्था को शिकायत दर्ज करानी होगी। समय पर शिकायत करने से मुआवजा मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
· साइबर फ्रॉड का पता चलते ही तुरंत बैंक हेल्पलाइन, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (National Cyber Crime Portal) पर शिकायत दर्ज करें।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है
आरबीआई का कहना है कि सिर्फ मुआवजे पर भरोसा करने के बजाय ग्राहकों को खुद भी सावधान रहना चाहिए। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपना ओटीपी (OTP) किसी के साथ साझा न करें, स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने से बचें और बैंक अधिकारी बनकर आने वाले फर्जी कॉल्स पर बिल्कुल भरोसा न करें। अपने बैंक खाते और यूपीआई ऐप के सुरक्षा फीचर्स का हमेशा इस्तेमाल करें।
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