14 साल पहले बिछड़ी और जिसे परिवार ने मृत मान लिया था, वह बेटी अब सकुशल अपने घर लौट आई है। देवघर बालिका गृह और चेतना विकास के प्रयासों से हुए इस भावुक पुनर्मिलन की पूरी कहानी पढ़ें कंचन क्रांति न्यूज पर।
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।
जिस बेटी की अर्थी उठने का गम सीने में दफन कर चुके थे, आज उसी बेटी को जिंदा और सुरक्षित अपने सामने पाकर ऐसा लगा मानो दुनिया की सारी खुशियां लौट आई हों। यह शब्द उन बदकिस्मत माता-पिता के आंसुओं और राहत की सांसों से निकले, जिन्होंने अपनी लाडली को 14 साल पहले खो दिया था और उसे मरा हुआ मान चुके थे।
गढ़वा जिले के रमना प्रखंड के चटनिया गांव की रहने वाली एक मानसिक रूप से अस्वस्थ किशोरी, जिसे वक्त और हालात अपनों से दूर ले गए थे, आखिरकार 14 साल के लंबे अंतराल के बाद अपने परिवार के आत्मीय आगोश में लौट आई है। बाल कल्याण समिति देवघर, चेतना विकास और चाइल्ड हेल्पलाइन के अथक व मानवीय प्रयासों ने एक बिखरे हुए परिवार को फिर से जोड़ दिया है।
साल 2011 का वो बिछोह और लंबी तलाश
वर्ष 2011 में यह किशोरी भटकते हुए पश्चिम बंगाल के हावड़ा जा पहुंची थी। उस वक्त उसकी मानसिक स्थिति बेहद नाजुक थी और वह अपना नाम, पता या अपनों के बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ थी। हावड़ा बाल कल्याण समिति ने उसे संरक्षण दिया और करीब एक साल तक उसकी देखभाल की। किशोरी सिर्फ इतना बता पाती थी कि वह झारखंड की रहने वाली है। इसी सुराग के आधार पर वर्ष 2012 में उसे देवघर स्थित बालिका गृह स्थानांतरित किया गया।
इलाज, उम्मीद और काउंसलिंग का सफर
देवघर बालिका गृह में उसकी देखरेख के साथ रांची स्थित रिनपास में उसका लगातार उपचार और नियमित काउंसलिंग कराई गई। मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों के कारण वर्षों तक परिवार का कोई ठोस सुराग नहीं मिला। लेकिन डॉक्टरों और सहयोगियों की मेहनत रंग लाई। धीरे-धीरे उसकी याददाश्त लौटने लगी। उसने पहले अपने पिता का नाम, फिर जिले और भाई-बहनों के नाम साझा किए। यही टूटे-फूटे शब्द परिवार तक पहुंचने का जरिया बने। बाल कल्याण समिति देवघर ने रमना थाना प्रभारी और स्थानीय मुखिया की मदद से आखिरकार उसके परिवार को ढूंढ निकाला।
आंसुओं से भीगा पुनर्मिलन का वह पल
जब परिजनों को यह खबर मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वर्षों से बेटी की कोई सुधि न मिलने पर उन्होंने मान लिया था कि वह अब इस दुनिया में नहीं है। दस्तावेजों के अनुसार अब उसकी उम्र करीब 30 वर्ष है। 14 साल के लंबे वनवास के बाद, 25 सितंबर 2026 को जब वह अपने परिवार को सौंपी गई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
इस मानवीय और पुनर्मिलन के पवित्र सफर में बाल कल्याण समिति देवघर; चेतना विकास देवघर की नीता पाठक और विजय यादव, चाइल्ड हेल्पलाइन देवघर के नंदकिशोर बास्की तथा रमना थाना के पूर्व एवं वर्तमान थाना प्रभारियों की भूमिका ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत और सेवाभाव से हर असंभव काम मुमकिन है।
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