राज्यपाल के निर्देश पर शुरू हुई विभागीय पहल, कॉलेज प्राचार्य और एसकेएमयू के कुलपति से मांगा गया सहयोग; बारिश, वज्रपात और तूफान का पूर्वानुमान लगाने में मिलेगी मदद
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।
अब संथाल परगना में मौसम का मिजाज बदलने, अचानक होने वाली बारिश और वज्रपात जैसी प्राकृतिक घटनाओं की निगरानी पहले से अधिक सटीक हो सकेगी। इसके लिए देवघर कॉलेज परिसर में अत्याधुनिक एक्स-बैंड डॉपलर मौसम रडार स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने देवघर कॉलेज के प्राचार्य और सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के कुलपति को पत्र भेजकर आवश्यक सहयोग देने तथा स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
दरअसल, सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के प्रयासों से केंद्र सरकार ने संथाल परगना में मौसम की बेहतर निगरानी के लिए डॉपलर मौसम रडार लगाने की मंजूरी दी थी। सांसद ने राज्यपाल संतोष गंगवार से भी आग्रह किया था कि रडार की स्थापना देवघर कॉलेज परिसर में कराई जाए। राज्यपाल के निर्देश के बाद अब इस दिशा में प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर पहल आगे बढ़ी है।
मांगी थी उपयुक्त सरकारी जमीन
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), रांची के वैज्ञानिक डॉ. पीपी बाबूराज ने 22 अक्टूबर 2026 को गवर्नर हाउस को पत्र लिखकर देवघर कॉलेज परिसर में मौसम रडार स्थापित करने के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव ने कॉलेज के प्राचार्य और विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र भेजकर आवश्यक सहयोग देने को कहा है।
पत्र में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, रांची के साथ समन्वय स्थापित कर इस योजना को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया है। रडार की स्थापना के लिए जमीन उपलब्ध कराने से लेकर अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में संबंधित संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
रांची के मौसम केंद्र से संथाल परगना का सटीक आकलन मुश्किल
देवघर में मौसम रडार स्थापित करने की मांग के पीछे भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियां भी प्रमुख वजह हैं। सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरण रिजिजू से देवघर में मौसम केंद्र स्थापित करने का आग्रह किया था। उनका तर्क था कि छोटानागपुर और संथाल परगना की मौसम संबंधी परिस्थितियों में काफी अंतर है। ऐसे में रांची स्थित मौसम केंद्र से संथाल परगना के मौसम का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण होता है।
स्थानीय स्तर पर मौसम की विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं होने का असर देवघर एयरपोर्ट पर विमानों के संचालन पर भी पड़ता है। वहीं, अचानक होने वाली भारी बारिश, वज्रपात और आंधी-तूफान की समय रहते जानकारी नहीं मिलने से किसानों और आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।
किसानों से लेकर विमान सेवा तक को होगा फायदा
देवघर कॉलेज परिसर में डॉपलर मौसम रडार स्थापित होने से संथाल परगना के मौसम की स्थानीय स्तर पर निगरानी मजबूत होगी। इससे बादलों की गतिविधियों, बारिश और तूफानी मौसम से जुड़ी परिस्थितियों का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी। मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर पूर्वानुमान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
इसका लाभ किसानों को खेती-किसानी से जुड़े फैसले लेने, आम लोगों को खराब मौसम के प्रति सतर्क रहने और विमानन सेवाओं को मौसम संबंधी परिस्थितियों का आकलन करने में मिल सकता है। इसके अलावा, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के पत्र में उल्लेख किया गया है कि रडार की स्थापना से देवघर कॉलेज के विद्यार्थियों को भी लाभ होगा। उन्हें मौसम विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जुड़ी जानकारियां हासिल करने के अवसर मिलेंगे।
क्या होता है डॉपलर मौसम रडार?
डॉपलर मौसम रडार एक अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल वायुमंडल में बादलों, बारिश, तूफानी गतिविधियों और हवा की गति का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह रेडियो तरंगों के माध्यम से काम करता है। रडार से भेजी गई तरंगें जब बारिश की बूंदों, बर्फ के कणों या ओलों से टकराकर वापस लौटती हैं, तो मशीन उनके संकेतों का विश्लेषण करती है।
डॉपलर तकनीक की मदद से वर्षा के साथ-साथ हवा की गति और दिशा का भी आकलन किया जा सकता है। इससे गरज-चमक वाले बादलों, तेज बारिश और तूफानी गतिविधियों की निगरानी में मदद मिलती है।
मौसम रडार मुख्य रूप से एस-बैंड, सी-बैंड और एक्स-बैंड जैसी अलग-अलग आवृत्ति श्रेणियों में काम करते हैं। इनका इस्तेमाल क्षेत्रफल, निगरानी की जरूरत और मौसम संबंधी उद्देश्यों के अनुसार किया जाता है।
एक्स-बैंड डॉपलर रडार की खासियत
- तरंगदैर्ध्य: लगभग 3 सेंटीमीटर।
- कवरेज: सामान्य परिस्थितियों में लगभग 100 किलोमीटर तक के क्षेत्र की निगरानी के लिए उपयोग किया जा सकता है। वास्तविक कवरेज रडार की क्षमता और भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
- बारीक निगरानी: छोटे क्षेत्र में बादलों और वर्षा की गतिविधियों का विस्तृत अध्ययन करने में उपयोगी।
- मौसम पूर्वानुमान: स्थानीय स्तर पर बारिश, गरज-चमक, ओलावृष्टि और तेज तूफानी बादलों की गतिविधियों को समझने में सहायक।
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