देवघर में रक्षा क्षेत्र की चार बड़ी परियोजनाओं के लिए 263 एकड़ भूमि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के विशेष प्रयासों से एम्स, एयरपोर्ट और त्रिकूट पर्वत के पास मिलिट्री यूनिट, डीआरडीओ और सैनिक स्कूल की स्थापना होगी।
कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।
झारखंड की धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी देवघर अब रक्षा क्षेत्र (Defence Sector) के नक्शे पर एक मजबूत और रणनीतिक केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। राज्य सरकार की ओर से भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी होते ही देवघर 'देदीप्यमान नक्षत्र' की तरह चमक उठेगा। यहां रक्षा मंत्रालय की चार बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की कवायद अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। शुरुआती लोकेशन के चयन और उच्चस्तरीय प्रजेंटेशन के बाद अब औपचारिक रूप से राज्य सरकार से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
रणनीतिक रूप से अहम है यह प्रोजेक्ट
इस पूरे बहुआयामी मामले को लेकर गोड्डा के लोकप्रिय सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं के मूर्त रूप लेने से देवघर में रक्षा मंत्रालय की दो प्रमुख मिलिट्री यूनिट्स स्थापित होंगी। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं के लिए सेना में बहाली के द्वार खुलेंगे, बल्कि विभिन्न प्रोजेक्ट्स के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का भी भारी सृजन होगा।
संताल परगना जैसे संवेदनशील क्षेत्र के लिए मील का पत्थर
सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह पहल संताल परगना जैसे संवेदनशील क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इससे क्षेत्र में असामाजिक तत्वों और बांग्लादेशी घुसपैठियों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। सेना की पैनी नजर रहने से पूरा देवघर क्षेत्र एक अति-सुरक्षित जोन के रूप में विकसित हो सकेगा। इन सभी प्रोजेक्ट्स के त्वरित क्रियान्वयन को लेकर रक्षा मंत्रालय के साथ उच्चस्तरीय संवाद जारी है।
263 एकड़ भूमि पर आकार लेंगी परियोजनाएं
देवघर में प्रस्तावित इन चारों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए कुल 263 एकड़ भूमि की आवश्यकता तय की गई है। सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के विशेष अनुरोध और रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर त्रिनिटी एरिया के जीओसी (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल पवन चड्ढा ने गत वर्ष 5 और 6 सितंबर को देवघर का दौरा कर प्रस्तावित स्थलों का गहन भौतिक निरीक्षण किया था।
स्थलीय मुआयने के बाद अब इन चारों परियोजनाओं के लिए विस्तृत भूमि संबंधी प्रस्ताव तैयार कर रक्षा मंत्रालय को भेज दिया गया है। इसके उपरांत, लेफ्टिनेंट जनरल पवन चड्ढा ने दिल्ली में सांसद डॉ. निशिकांत दुबे से मुलाकात कर इन सभी परियोजनाओं का एक विस्तृत प्रजेंटेशन भी साझा किया था। गौरतलब है कि देवघर प्रवास के दौरान उन्होंने एम्स के समीप स्थित डीआरडीओ केंद्र में ऑपरेशनल तैयारियों, ट्रेनिंग स्टैंडर्ड, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तथा ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंट एंड डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) क्षमता की उच्चस्तरीय समीक्षा भी की थी।
इन प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए सुगमता से जमीन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लेफ्टिनेंट जनरल पवन चड्ढा ने देवघर के उपायुक्त सौरभ भुवानिया से भी मुलाकात की थी और राज्य सरकार से जल्द से जल्द भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। प्रस्ताव में भूमि अधिग्रहण के लिए कई व्यावहारिक विकल्प रखे गए हैं, जिनमें अनुदान, लीज, भूमि एक्सचेंज (LVE Exchange) और प्रत्यक्ष खरीद शामिल हैं। विशेष तौर पर, 'एलवीई एक्सचेंज' के तहत झारखंड में सेना के पास उपलब्ध अतिरिक्त भूमि के बदले राज्य सरकार को इन रक्षा परियोजनाओं के लिए जमीन हस्तांतरित करने की संभावना पर भी विचार चल रहा है।
परियोजना एक नजर में
सुविधा तथा सैनिक आरामगृह (11 एकड़)
एम्स के समीप करीब 11 एकड़ भू-भाग पर एक आधुनिक 'इंटीग्रेटेड फैसिलिटी' विकसित की जाएगी। इस एकीकृत परिसर के तहत ईसीएचएस (ECHS) पॉलीक्लिनिक, जिला सैनिक कल्याण (ZSW) कार्यालय, सीएसडी (CSD) एक्सटेंशन काउंटर, नमन व स्पर्श की सुविधा तथा एक सुसज्जित सैनिक आरामगृह का निर्माण किया जाना है। इस केंद्र के बनने से पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रक्षा सेवा से जुड़े तमाम परिवारों को स्वास्थ्य, कैंटीन और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे सुलभ हो सकेंगी।
डीआरडीओ सुविधा और सुरक्षा परिसर (92 एकड़)
देवघर एयरपोर्ट के ठीक समीप डीआरडीओ-1 और टेरिटोरियल आर्मी (TA) बटालियन (झारखंड H&H) के लिए 92 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य संबंधित सामरिक डीआरडीओ सुविधा की सुरक्षा को अचूक बनाना है। इसके विकसित होने से इस क्षेत्र में रक्षा ढांचे और सैन्य उपस्थिति को अभेद्य मजबूती मिलेगी।
डीआरडीओ के विस्तार परिसर (95 एकड़)
देवघर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल त्रिकूट पर्वत के पास डीआरडीओ के विस्तार और टीए बटालियन की स्थापना के लिए 95 एकड़ जमीन की जरूरत है। इन दोनों स्थानों (एयरपोर्ट और त्रिकूट) का चयन सामरिक और रणनीतिक स्थिति को सर्वोपरि रखकर किया गया है, जो सुरक्षा तंत्र को द्वि-स्तरीय मजबूती प्रदान करेगा।
सैनिक स्कूल (65 एकड़):
देवघर एयरपोर्ट जाने वाले मुख्य मार्ग पर 65 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में एक भव्य सैनिक स्कूल की स्थापना की योजना है। इस प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से विद्यार्थियों को सामान्य एवं उच्च शिक्षा के साथ-साथ कड़ा सैन्य अनुशासन, उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता और भविष्य की रक्षा सेवाओं के अनुकूल एक अनुशासित व अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा। इससे यहाँ की युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय स्तर पर सेवा देने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा।