देवघर में फिंगर स्टॉकिंग योजना के लाभार्थियों के चयन में अनियमितता के आरोप लगे हैं। किसानों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है और शिकायत डीडीसी तक पहुंचाई है।
चंदन कुमार ठाकुर, मधुपुर (देवघर)।
देवघर जिले में मत्स्य विभाग की फिंगर स्टॉकिंग यानी मछली बीज संचय योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ मत्स्य पालकों ने योजना के लाभार्थियों के चयन में अनियमितता, अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने और वास्तविक किसानों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ सुनिश्चित करने की मांग की है।
लाभार्थियों के चयन में अनियमितता का आरोप
शिकायत करने वाले किसानों का आरोप है कि योजना के तहत मछली बीज संचय का लाभ वास्तविक मत्स्य पालकों तक पहुंचने के बजाय कुछ ऐसे लोगों को दिया जा रहा है, जिनका मत्स्य पालन से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। किसानों ने आशंका जताई है कि कुछ बिचौलिये लंबे समय से योजना का लाभ उठाते आ रहे हैं, जबकि जरूरतमंद और पात्र मत्स्य पालक इससे वंचित रह जाते हैं। किसानों ने लाभार्थियों की सूची की जांच कराने और अपात्र लोगों के नाम हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ निर्धारित मानकों के अनुरूप वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए।
कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं ने मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी है। उनका दावा है कि कागजी औपचारिकताएं पूरी कर लिए जाने के बावजूद वास्तविक मत्स्य पालकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों ने योजना से संबंधित अभिलेखों, लाभार्थियों की सूची और वितरण प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में विभाग का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
डीडीसी तक पहुंचाई गई शिकायत
मामले से संबंधित दस्तावेज और शिकायतें मीडिया के माध्यम से देवघर के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) तक पहुंचाए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, डीडीसी के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर पर भी मामले से संबंधित जानकारी साझा की गई। इसके बाद व्हाट्सएप पर हुई बातचीत में डीडीसी ने ‘ओके’ लिखकर प्रतिक्रिया दी। शिकायतकर्ता ने इसे मामले की जांच कराए जाने के आश्वासन के रूप में बताया है। हालांकि, जांच के लिए औपचारिक आदेश जारी हुआ है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन शिकायतों की जांच किस स्तर पर कराता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
किसानों ने की कार्रवाई की मांग
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि फिंगर स्टॉकिंग योजना के लाभार्थियों के चयन और मछली बीज वितरण की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। उनका कहना है कि योजना का लाभ वास्तविक मत्स्य पालकों तक पहुंचाना और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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