देवघर के करों प्रखंड स्थित भीतिया तुरी टोला में छह महीने से सरकारी चापाकल खराब है। दर्जनों परिवार पेयजल संकट से परेशान हैं। ग्रामीणों ने मरम्मत नहीं होने पर प्रखंड कार्यालय घेराव की चेतावनी दी।

चंदन कुमार ठाकुर, मधुपुर (देवघर)।

सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने और जल संकट दूर करने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से अलग नजर आ रही है। देवघर जिले के करों प्रखंड अंतर्गत बघनाडीह पंचायत के भीतिया तुरी टोला में पिछले छह महीने से एक सरकारी चापाकल बंद पड़ा है। इसके कारण टोले के दर्जनों परिवारों के सामने पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद न तो चापाकल की मरम्मत कराई गई और न ही पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

पाइप, हत्था और जाली खराब, छह महीने से बंद है चापाकल

ग्रामीणों के अनुसार, ननकू तुरी (पिता सुधान तुरी) के घर के पास स्थित सरकारी चापाकल लंबे समय से खराब है। चापाकल का अंदरूनी पाइप, हत्था और जाली दुरुस्त नहीं होने के कारण इससे पानी निकलना बंद हो गया है। मामूली मरम्मत के अभाव में सरकारी चापाकल अनुपयोगी बना हुआ है। टोले के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत करा दी जाती तो उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

महिलाओं और बच्चों पर बढ़ा पानी जुटाने का बोझ

चापाकल बंद रहने का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। घरों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दूर-दराज के स्थानों से पानी लाना पड़ रहा है। सुबह से ही पानी की व्यवस्था करने में काफी समय और मेहनत खर्च हो रही है। इससे घरेलू कामकाज के साथ बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। गर्मी के मौसम में पेयजल की उपलब्धता को लेकर परेशानी और बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई मरम्मत, जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या से पंचायत के मुखिया और क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों को कई बार मौखिक एवं लिखित रूप से अवगत कराया गया है। इसके बावजूद अब तक चापाकल को चालू कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। छह महीने से बनी इस समस्या के समाधान में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों और संबंधित व्यवस्था के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी यदि उन्हें महीनों तक इंतजार करना पड़े तो सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचने के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्रखंड कार्यालय के घेराव की चेतावनी

लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब चापाकल की मरम्मत कराने और नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही चापाकल को दुरुस्त कर चालू नहीं कराया गया तो वे करों प्रखंड कार्यालय का घेराव करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि पेयजल संकट के समाधान में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अब देखना यह है कि प्रखंड प्रशासन और संबंधित पेयजल विभाग ग्रामीणों की इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और छह महीने से बंद पड़े चापाकल को चालू कराने के लिए कब तक कार्रवाई करते हैं।

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