देवघर में राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर में 1,880 लाभुकों के बीच 14.46 करोड़ की परिसंपत्तियों और सहायता का वितरण, प्रोजेक्ट शिशु के तहत 2,200 अनाथ बच्चों की शिक्षा और संरक्षण की पहल की सराहना
विकास कुमार, देवघर।
न्याय व्यवस्था की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति और गरीबों तक पहुंचे। न्याय व्यवस्था को सामाजिक व्यवस्था और गरीबों के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभानी होगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने देवघर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर में यह बात कही। उन्होंने न्याय को केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय जरूरतमंदों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और वास्तविक सहायता से जोड़ने पर जोर दिया।
शिविर के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत 1,880 लाभुकों के बीच कुल 1,446.90 लाख रुपये यानी 14 करोड़ 46 लाख 90 हजार रुपये की परिसंपत्तियों और सहायता का वितरण किया गया। पीड़ितों को चेक के माध्यम से प्रतिकार राशि भी प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने पलामू के भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय और रांची के सरला बिरला विश्वविद्यालय में स्थापित विधिक सहायता क्लीनिक का वर्चुअल उद्घाटन किया। इन क्लीनिकों के माध्यम से विद्यार्थियों और आम लोगों को विधिक सहायता एवं कानूनी अधिकारों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की गई है।
अंतिम व्यक्ति तक न्याय और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना लक्ष्य

झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने स्वागत एवं उद्घाटन संबोधन में कहा कि शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। विधिक अधिकारों की जानकारी तभी सार्थक होगी, जब उसे वास्तविक सहायता से जोड़ा जाए। कोई भी व्यक्ति केवल जानकारी, आवश्यक दस्तावेज या उचित मार्गदर्शन के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिविर की सफलता का आकलन केवल परिसंपत्तियों और सहायता राशि के वितरण से नहीं किया जाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि प्रत्येक लाभुक तक सहायता पहुंचे, लंबित आवेदनों पर कार्रवाई हो और संबंधित विभाग नियमित रूप से इसकी समीक्षा करें। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के देवघर आगमन पर आभार व्यक्त किया।
प्रोजेक्ट शिशु से 2,200 अनाथ बच्चों को मिला संरक्षण और शिक्षा का सहारा

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में झालसा की ओर से संचालित प्रोजेक्ट शिशु की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों को संरक्षण, शिक्षा और विधिक सहायता उपलब्ध कराने की यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 10 वर्ष पहले शुरू किए गए इस प्रयास के तहत अब तक लगभग 2,200 अनाथ बच्चों के संरक्षण और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से कई बच्चों को पढ़ाई छोड़कर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने अथवा कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने की मजबूरी से बचाया जा सका है। इन बच्चों की शिक्षा लगातार जारी है और कई बच्चे उच्च शिक्षा के अगले स्तर तक पहुंच चुके हैं। अब उनके बेहतर करियर और भविष्य के निर्माण में भी झालसा सहयोग कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह पहल आगे भी जारी रहेगी।
न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के देवघर आगमन को जिले और पूरे झारखंड के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद मुख्य न्यायाधीश का देवघर आना और यहां के लोगों के बीच उपस्थित होना महत्वपूर्ण है। इसके लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।
मेडिएशन फॉर द नेशन अभियान की सराहना
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के नेतृत्व और न्यायिक पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि घर-घर और हर द्वार तक न्याय पहुंचाने की सोच को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। विधिक सेवा के क्षेत्र में शुरू की गई विभिन्न पहल अब देशभर में विस्तार पा रही हैं और उनका प्रभाव भी व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से मेडिएशन फॉर द नेशन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। इसके माध्यम से विवादों के समाधान की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिली है। उन्होंने नालसा की वीर परिवार सहायता योजना की भी सराहना की।
11 स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं की ली जानकारी

राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर के दौरान सिविल कोर्ट परिसर में विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से 11 स्टॉल लगाए गए थे। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया और विभागों की ओर से संचालित योजनाओं तथा लोगों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। स्टॉलों के माध्यम से सरकारी योजनाओं, सामाजिक सुधार, कृषि, स्वास्थ्य, रोजगार और विधिक सहायता से संबंधित जानकारी दी गई।
लाभुकों को मिली शिक्षा, आवास, पेंशन और प्रतिकार राशि की सहायता

शिविर में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के हाथों विभिन्न योजनाओं के लाभुकों को सहायता प्रदान की गई। प्रोजेक्ट शिशु के तहत चिराग आनंद, अमन कुमार दास और कालीचरण को शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष 50-50 हजार रुपये की सहायता दी गई। वहीं अन्य योजनाओं के तहत रामादेवी को नक्सली हिंसा में पति की मौत के बाद दो लाख रुपये, शालिनी देवी को पति की मृत्यु पर दुर्घटना बीमा के तहत 18 लाख रुपये, शिशिर कुमारी को सात लाख रुपये और साजमा खातून को पांच लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।
इसके अलावा मां काली सखी मंडल को आठ लाख रुपये की सहायता, प्रीति कुमारी को एक हजार रुपये मासिक पेंशन का लाभ तथा सरिता देवी को अंबेडकर आवास के लिए दो लाख रुपये की सहायता दी गई।
कार्यक्रम में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय सहित अन्य न्यायाधीश, न्यायिक पदाधिकारी, जिला प्रशासन के अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
................................................................................................
सुझाव, शिकायत और सूचना के लिए संपर्क करें
Office - Kanchanwani Media Network, Gayatri Colony, Opp. - Shivay Guest House, Dabour Gram, Jasidih, Deoghar, Jharkhand - 814142
Email - info@kanchankranti.com
M.N. 8987259822