कंचन क्रांति न्यूज, देवघर।

सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ अनुशासन, स्वच्छता और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की दिशा में देवघर जिला प्रशासन की पहल 'प्रोजेक्ट इम्पैक्ट' का दायरा लगातार बढ़ रहा है। महज 13 विद्यालयों से शुरू हुआ यह अभियान अब जिले के सभी प्रखंडों के 90 सरकारी विद्यालयों तक पहुंच चुका है। इसी क्रम में शुक्रवार को आर. मित्रा उच्च विद्यालय, देवघर में प्रोजेक्ट इम्पैक्ट की चौथी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विद्यालयों में संचालित गतिविधियों की समीक्षा के साथ उनके सामने आ रही समस्याओं और सुधार की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया के निर्देशानुसार आयोजित बैठक में जिले के विभिन्न प्रखंडों के 90 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य विद्यालयों में प्रोजेक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित निगरानी और निर्धारित गतिविधियों को बेहतर तरीके से लागू करना रहा।

13 विद्यालयों से शुरू होकर 90 स्कूलों तक पहुंचा अभियान

बैठक में बताया गया कि जिला प्रशासन ने 21 अगस्त 2026 को प्रोजेक्ट इम्पैक्ट की शुरुआत 13 पायलट विद्यालयों से की थी। शुरुआती विद्यालयों में इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद इसका विस्तार किया गया। अब जिले के सभी प्रखंडों के कुल 90 सरकारी विद्यालय इस अभियान से जुड़ चुके हैं।

इस पहल के माध्यम से विद्यालयों में केवल पढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय बच्चों के सर्वांगीण विकास, अनुशासन, स्वच्छता, नियमितता और व्यक्तित्व निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार हो, जहां बच्चे पढ़ाई के साथ जीवनोपयोगी गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करें।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को मिलेगा सम्मान

समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त ने सभी प्रधानाध्यापकों से उनके विद्यालयों में प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के दौरान आ रही समस्याओं और सुझावों की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट इम्पैक्ट के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से कहा कि गूगल फॉर्म के माध्यम से विद्यालयों की गतिविधियों और उपलब्धियों से संबंधित जानकारी पूरी ईमानदारी और वास्तविकता के आधार पर दर्ज करें। सही आंकड़े और वास्तविक स्थिति सामने आने से विद्यालयों की जरूरतों को समझने तथा भविष्य की सुधार योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।

उप विकास आयुक्त ने कहा कि प्रोजेक्ट इम्पैक्ट को किसी अतिरिक्त कार्य या विभागीय बोझ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे विद्यालय की नियमित दैनिक कार्यचर्या का हिस्सा बनाया जाए, ताकि अनुशासन, स्वच्छता और शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो सके।

वहीं, जिला शिक्षा अधीक्षक ने प्रधानाध्यापकों की शंकाओं का समाधान करते हुए प्रोजेक्ट की गतिविधियों के सकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अपनाई जा रही अच्छी कार्यप्रणालियों से उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

प्रार्थना सभा से लेकर योग और सामान्य ज्ञान तक पर जोर

प्रोजेक्ट इम्पैक्ट के तहत सरकारी विद्यालयों की दिनचर्या में कई महत्वपूर्ण गतिविधियों को शामिल किया गया है। इनमें हाउसवार प्रार्थना सभा का आयोजन, विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर बच्चों का आत्मीय स्वागत और विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म एवं व्यक्तिगत स्वच्छता की नियमित जांच प्रमुख हैं।

इसके अलावा विद्यालय परिसर और दीवारों को आकर्षक शैक्षणिक मॉडल के माध्यम से ज्ञानवर्धक बनाया जा रहा है। बच्चों की बौद्धिक क्षमता विकसित करने के लिए सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। वहीं, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नियमित व्यायाम और योगाभ्यास कराया जाता है।

विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता, राष्ट्रीय भावना और सामूहिक सहभागिता विकसित करने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय एवं सामाजिक दिवस भी नियमित रूप से मनाए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, स्वच्छता की आदत और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

ऑनलाइन निगरानी से होगी विद्यालयों की नियमित समीक्षा

प्रोजेक्ट की गतिविधियों को केवल निर्देशों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उनके नियमित क्रियान्वयन और प्रगति की निगरानी के लिए भी व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत प्रत्येक विद्यालय दैनिक चेकलिस्ट तैयार करता है और मासिक स्व-मूल्यांकन करता है। इसकी रिपोर्ट गूगल फॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन जमा की जाती है।

इस व्यवस्था से जिला प्रशासन को अलग-अलग विद्यालयों में गतिविधियों की स्थिति, कमियों और उपलब्धियों का आकलन करने में मदद मिलती है। साथ ही, जिन विद्यालयों में सुधार की आवश्यकता है, वहां समय रहते आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर, प्रोजेक्ट इम्पैक्ट के माध्यम से देवघर जिला प्रशासन सरकारी विद्यालयों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय अनुशासन, स्वच्छता, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास का बेहतर केंद्र बनाने की दिशा में प्रयासरत है। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विद्यालयों में निर्धारित गतिविधियां कितनी नियमितता और गंभीरता से लागू होती हैं तथा उनका विद्यार्थियों की पढ़ाई और व्यवहार पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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